यूपी में रंगों वाली पॉलीटिक्स! नीला गमछा, भगवा रथ... मायावती का अखिलेश यादव पर तीखा हमला, बोलीं- क्या सपा का मुसलमानों से भरोसा उठ गया
बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा के 'पीडीए रथ' को लेकर हमला किया है। मायावती का आरोप है कि सपा प्रमुख ने लाल छोड़कर भगवा ओढ़ लिया है
- भारत
- 4 min read

बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा के 'पीडीए रथ' को लेकर हमला किया है। मायावती का आरोप है कि सपा प्रमुख ने लाल छोड़कर भगवा ओढ़ लिया है। मायावती ने कहा कि अखिलेश का पीडीए रथ आरएसएस और भाजपा का भगवाकरण है। जो कि साफ दर्शाता है कि मुसलमानों पर सपा का वोट पाने का भरोसा उठ गया है। मायावती का दावा है कि अपरकास्ट खासकर ब्राह्मण समाज और मुस्लिम भी बीएसपी के पक्ष में बदल रहे हैं।
मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म एक्स पर लिखा कि विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए तैयार पीडीए रथ सपा के अपने लाल रंग का कम और आरएसएस-भाजपा के भगवा रंग का ज्यादा दिखाई देता है। पूछा कि यह हिंदू वोटों की खातिर गिरगिट की तरह लगातार रंग बदलना है या मुसलमानों से भरोसा उठ गया है?
इन 5 प्वाइंटस के माध्यम से मायावती ने बोला हमला
1. यूपी के आगामी विधानसभा आमचुनाव की तैयारी हेतु समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख का प्रचारित ’पीडीए रथ’ सपा के अपने लाल रंग का कम तथा आरएसएस/भाजपा के ’भगवा’ रंग का (भगवाकरण) ज़्यादा है, तो ऐसे में लोगों में चर्चा यही है कि यह सब उनका वोटों के स्वार्थ की ख़ातिर गिरगिट की तरह लगातार रंग बदलना है या फिर मुसलमानों पर से सपा प्रमुख का वोट पाने का भरोसा उठ जाना है?
Advertisement
2. वैसे भी यूपी के ख़ासकर मुस्लिम समाज को इस कड़वी हकीकत का पूरी तरह से अहसास है कि पिछले चुनावों में सपा को उनके द्वारा अधिकांश एकतरफा वोट देने के बावजूद भी यह पार्टी (सपा) यूपी व केन्द्र की सत्ता में भाजपा को सरकार बनाने से नहीं रोक पाती है तो इस पार्टी को बार-बार वोट देकर अपना वोट ख़राब क्यों किया जाये और इस मामले में अब वे अपरकास्ट में से ख़ासकर ब्राह्मण समाज की तरह ही अपना रवैया काफी तेज़ी से बी.एस.पी. के पक्ष में बदल रहे हैं।
3. क्योंकि बी.एस.पी. यूपी में खासकर अपराध नियंत्रण व शान्ति-व्यवस्था के मामलों में क़ानून द्वारा क़ानून के राज के साथ ही व्यापक जनहित, जनकल्याण एवं विकास के मामलों में भी बेहतरीन आयरनलेडी राज यहाँ कई बार स्थापित करके दिखा चुकी है और जिसकी सर्वसमाज के हित व कल्याण में प्रदेश को सख़्त ज़रूरत भी है।
Advertisement
4. इसके साथ ही, सपा को यह भी जनता को ज़रूर बता देना चाहिये कि अब इनके ’पीडीए’ की असली वास्तविकता क्या है? क्योंकि चुनावी स्वार्थ में अब तक इन्होंने कभी ’पीडी’ को ’पिछड़ा, दलित’ बताया तो कभी ’पीडी’ को ’पण्डित’ बताया है और कभी अपने आपको ’अम्बेडकरवादी’ दर्शाने के चक्कर में बी.एस.पी. का ’नीला’ रंग वाला वस्त्र धारण कर तस्वीरें खिंचवाई है, किन्तु इसको लोगों ने फौरन ही फेक अम्बेडकरवादी कहकर रिजेक्ट भी कर दिया।
5. जबकि इसके विपरीत, बी.एस.पी. सर्वसमाज हेतु ’सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति व सिद्धान्त वाली अम्बेडकरवादी पार्टी है तथा सभी को रोटी-रोज़गार-युक्त आत्म-सम्मान व स्वाभिमान आदि का जीवन जीने की पक्षधर है। इसीलिये सर्वसमाज में बी.एस.पी. का अपना सम्मान है।
प्रदेश को बहुजन समाजवादी पार्टी की जरूरत
मायावती ने कहा कि बीएसपी यूपी में खासकर अपराध नियंत्रण और शांति-व्यवस्था के मामलों में कानून द्वारा कानून के राज के साथ ही व्यापक जनहित, जनकल्याण एवं विकास के मामलों में भी बेहतरीन आयरनलेडी राज यहां कई बार स्थापित करके दिखा चुकी है और जिसकी सर्वसमाज के हित व कल्याण में प्रदेश को सख्त जरूरत भी है।
आखिर क्यों सपा ने अपनाया 'नीला' रंग?
दरअसल, सपा प्रमुख अखिलेश यादव अपने पारंपरिक रंग के दायरे से बाहर निकलकर बहुजन प्रतीक चिह्नों को सपा के बैनर तले लाने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। बीते दिनों 'समाजवादी छात्रसभा' के कार्यकर्ताओं के लिए नीली टी-शर्ट और लाल टोपी का ड्रेस कोड लागू किया गया है। इसके अलावा अखिलेश यादव खुद सार्वजनिक कार्यक्रमों और बैठकों में नीले रंग का मफलर पहने नजर आए। बसपा के सबसे मजबूत कैडर 'दलित वोट बैंक' में अखिलेश यादव की इस सेंधमारी से बसपा खेमा असहज है। यही वजह है कि मायावती ने सीधे तौर पर सपा के 'नीले प्रयोग' को नकली करार देते हुए यह कहा है कि समाजवादी पार्टी सिर्फ वोटों के लिए अपने रंग और नीतियां बदलती है।