मथुरा श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामला: हिंदू पक्ष की 18 याचिकाओं पर सुनवाई पूरी, HC ने फैसला रखा सुरक्षित

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस मयंक कुमार की सिंगल बेंच ने हिन्दू पक्ष की कुल 18 याचिकाओं पर सुनवाई पूरी होने के बाद इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।

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Mathura Eidgah
मथुरा ईदगाह | Image: PTI

मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह (विवादित परिसर) मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी कर ली है। इस मामले में हाईकोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने इस मामले में मीडिया से बातचीत करते हुए बताया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस मयंक कुमार की सिंगल बेंच ने हिन्दू पक्ष की कुल 18 याचिकाओं पर सुनवाई पूरी होने के बाद इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। उन्होंने बताया कि सिविल वाद की पोषणीयता पर दोनों पक्षों की सुनवाई पूरी हुई। 

इसके पहले इस साल की शुरुआत में जनवरी महीने में सुप्रीम कोर्ट ने इलाहबाद हाईकोर्ट के ईदगाह मस्जिद सर्वे के आदेश पर रोक लगा दी थी। इस मामले को लेकर सर्वोच्च न्यायालय ने कहा था कि इस केस में हाईकोर्ट में सुनवाई जारी रहेगी। वहीं इसके पहले पिछले साल 14 दिसंबर को श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह मस्जिद के विवादित स्थल को मंजूरी दी थी। 

क्या है पूरा विवाद?

मथुरा की श्रीकृष्ण जन्मभूमि और शाही ईदगाह को लेकर कुल 13.37 एकड़ जमीन का विवाद है। इस विवाद में मालिकाना हक को लेकर दोनों पक्षों ने दावा किया था। पूरे परिसर में 11 एकड़ की जमीन में भगवान श्रीकृष्ण का मंदिर है और 2.37 एकड़ जमीन का हिस्सा शाही ईदगाह मस्जिद के पास है। इसी जमीन को लेकर हिंदू पक्ष इस बात का दावा करता है कि यहां पर श्रीकृष्ण जन्मभूमि इसलिए ये हिन्दू पक्ष में होनी चाहिए।  

350 साल पुराना है विवाद

अगर इतिहास में जाकर देखें तो अब से लगभग 350 साल पहले इस विवाद को हवा मिली थी जब दिल्ली की सत्ता पर मुगल बादशाह औरंगजेब बैठा था। साल 1670 में मुगल शासक औरंगजेब ने मथुरा में बने भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थल पर बने मंदिर को तोड़ने का आदेश दिया। इस जगह को तोड़कर ही शाही ईदगाह मस्जिद बनाई गई थी। इटली के एक यात्री निकोलस मनूची ने अपने एक लेख में इस बात का जिक्र किया था। उसने लिखा था कि रमजान महीने में भगवान श्रीकृष्ण के जन्मस्थान को मुगल बादशाह के आदेश पर नष्ट किया गया था। ईदगाह बनने के बाद ये जमीन मुसलमानों के कब्जे में चली गई और लगभग 100 साल तक यहां हिंदुओं का प्रवेश पर रोक लगा दी गई थी।

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Published By:
 Ravindra Singh
पब्लिश्ड