संभल SP केके बिश्नोई की शादी में पिंकी यादव समेत 3 विधायक पहुंचे तो सपा में चढ़ा सियासी पारा, भड़के अखिलेश यादव ले सकते हैं एक्शन, BJP भी कूदी
IPS केके बिश्नोई और अंशिका वर्मा की शादी में सपा के तीन विधायकों ने शिरकत की थी। अब इसे लेकर यूपी में सियासी पारा चढ़ गया है। अखिलेश यादव ने अपने विधायकों नसीहत दे डाली है।
- भारत
- 3 min read

उत्तर प्रदेश कैडर के दो IPS अधिकारियों की हाल के दिनों में हुई शादी काफी चर्चा में बनी हुई है। संभल के SP कृष्ण कुमार बिश्नोई और बरेली की एसपी साउथ अंशिका वर्मा शादी के बंधन में बंध गए हैं। राजस्थान के जोधपुर में हुई शाही शादी की तस्वीरें,वीडियो, रील्स सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं। शादी में प्रशासन के तमाम आलाधिकारी के साथ-साथ कई दलों के नेता भी शामिल हुए। मगर सपा के विधायकों को इस शादी में शामिल होना भारी पड़ गया। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव उनके इस फैसले नाराज हो गए।
IPS केके बिश्नोई और अंशिका वर्मा की शादी में सपा के तीन विधायक (इकबाल महमूद - संभल, पिंकी यादव - असमोली, रामखिलाड़ी यादव - गुन्नौर) और संभल जिलाध्यक्ष असगर अली अंसारी शादी/रिसेप्शन में गए। मेहमानों के बीच सेल्फी का दौर चलता रहा, जिसमें सपा के ये तीनों नेता भी नजर आए। यहीं से विवाद ने सियासी रंग पकड़ लिया। मामला पार्टी प्रमुख तक पहुंच गया। उन्होंने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सार्वजनिक तौर पर विधायकों के इस फैसले पर नाराजगी जताई।
अखिलेश यादव ने क्या कहा?
लखनऊ में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव ने साफ कहा कि "उन्हें नहीं जाना चाहिए था"। उन्होंने कहा कि पार्टी की ओर से पहले ही ऐसे कार्यक्रमों में जाने से मना किया गया था, फिर भी गए। अब पार्टी में बातचीत कर उन्हें समझाया जाएगा। ऐसे विधायकों को नसीहत दी जाएगी कि ऐसे कार्यक्रम से दूरी बनाकर रखें।
विधायकों को पार्टी की नसीहत
सपा के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल और मीडिया सेल ने भी सार्वजनिक तौर पर नसीहत दी। केके बिश्नोई को 'विवादित' और 'भाजपाई' बताया गया। पार्टी का तर्क है कि बदलते राजनीतिक माहौल में बिश्नोई ने सपा नेताओं को आमंत्रित किया, लेकिन ऐसे कार्यक्रमों से दूरी बनानी चाहिए। संभल में बीते दिनों हुए पिछले बवाल के बाद पुलिस प्रशासन और सपा के बीच उपजे तनाव के मद्देनजर अखिलेश यादव का यह रुख काफी सख्त माना जा रहा है।
Advertisement
BJP ने क्या कहा?
पूरे विवाद पर बीजेपी की भी प्रतिक्रिया आई है। भाजपा प्रवक्ता राकेश त्रिपाठी ने अखिलेश यादव के फरमान पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि SP और BSP अपने शासनकाल में प्रशासनिक मशीनरी का राजनीतिकरण कर दिया है। मगर बीजेपी की सोच इससे बिल्कुल अलग है। पार्टी का मानना है कि अधिकारी किसी जाति या पार्टी के खांचे में नहीं होते, उनकी जवाबदेही जनता के प्रति है। अखिलेश यादव खुद भी ऐसे कई कार्यक्रमों में जाते हैं और आज अपने विधायकों पर सवाल उठा रहे हैं।