Updated March 29th, 2024 at 13:14 IST

जब थर्रा उठा गाजीपुर... अफजाल पर जीत फिर मुख्तार की जेल से साजिश और कृष्णानंद पर 500 राउंड फायरिंग

29 नवंबर, 2005। उत्तर प्रदेश का गाजीपुर इस दिन लाल रंग से रंग गया। बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय समेत कई लोगों को गोलियों ने भून दिया गया। 500 राउंड फायरिंग हुई।

Reported by: Ritesh Kumar
मुख्तार अंसारी की मौत | Image:pti
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BJP MLA Krishnanand Rai Murder: कुख्यात गैंगस्टर और विधायक मुख्तार अंसारी का अंत हो चुका है। गुरुवार को बांदा जेल में बंद मुख्तार को दिल का दौरा पड़ा और फिर मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। किस्मत देखिए, 15 साल की उम्र से ही जेल जाने की चाहत रखने वाले मुख्तार ने अंतिम सांस भी जेल में ही ली। वैसे तो मुख्तार के गुनाहों की लिस्ट बहुत लंबी है, लेकिन एक वारदात ऐसी है जिससे एक समय पर पूरा पूर्वाञ्चल थर्रा उठा था।

29 नवंबर, 2005। उत्तर प्रदेश का गाजीपुर इस दिन लाल रंग से रंग गया। बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय समेत कई लोगों को गोलियों ने भून दिया गया। 500 राउंड फायरिंग हुई और जब कृष्णानंद राय की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो उनके शरीर में लगभग 100 गोलियां निकली। इस वारदात से पूरा उत्तर प्रदेश सहम गया। इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी मुख्तार अंसारी और उसके भाई अफजाल अंसारी को बनाया गया। इस घटना के बाद से मुख्तार जेल से कभी बाहर नहीं आ सका।

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कृष्णानंद हत्याकांड की पूरी कहानी

मुख्तार अंसारी पहली बार 1996 में मऊ सीट से विधायक चुने गए। पूर्वाञ्चल में उसका दबदबा था। लेकिन 6 साल बाद कहानी बदली और बीजेपी के कृष्णानंद राय ने उन्हें चैलेंज दिया। 2002 के विधानसभा चुनाव में कृष्णानंद ने मुख्तार के भाई अफजाल अंसारी को हराकर विधायक चुने गए। हैरान करने वाली बात ये है कि जिस समय कृष्णानंद राय की हत्या हुई उस वक्त मुख्तार अंसारी जेल में था। अपने गढ़ में भाई का चुनाव हारना उसे रास नहीं आया। बताया जाता है कि उसने जेल से ही बीजेपी नेता को मारने की पूरी साजिश रची।

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सीबीआई ने की थी मामले की जांच

विधायक कृष्णानंद राय की हत्या से बीजेपी नेताओं में आक्रोश दिखा। इसके बाद से मुख्तार गैंग को मिटाने की तैयारी शुरू हुई। इस हत्याकांड के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की, लेकिन इसे इनकार कर दिया गया। फिर कृष्णानंद राय की पत्नी अल्का राय ने CBI जांच करने की याचिका डाली जिसे हाईकोर्ट ने स्वीकार किया। 3 जुलाई, 2019 को दिल्ली की सीबीआई कोर्ट ने इस मामले पर फैसला सुनाया जिसमें मुख्तार अंसारी, मुन्ना बजरंगी, रफीक और 5 अन्य सहित सभी आठ आरोपियों को बरी कर दिया गया।

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Published March 29th, 2024 at 13:06 IST

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