पूजा खेडकर ने पटियाला हाउस कोर्ट में दाखिल की अग्रिम जमानत की याचिका, आज होगी सुनवाई
प्रोबेशनरी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर ने राहत के लिए दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। मामले में आज कोर्ट में सुनवाई होगी।
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प्रोबेशनरी आईएएस अधिकारी पूजा खेडकर ने राहत के लिए दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल की है। अंतरिम जमानत को लेकर दिल्ली कोर्ट में आज सुनवाई होगी। बता दें, इससे पहले, दिल्ली पुलिस ने पूजा मनोरमा दिलीप खेडकर के खिलाफ संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) द्वारा दायर एक शिकायत के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की थी।
केंद्र ने विवादास्पद आईएएस पूजा खेरकर के खिलाफ सभी आरोपों की जांच के लिए एक सदस्यीय पैनल का गठन किया था। बीते शनिवार को पैनल ने पूजा पर अपनी जांच रिपोर्ट कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (डीओपीटी) को सौंप दी। कुछ दिन पहले 2023 बैच की आईएएस ट्रेनी पूजा पर सत्ता के दुरुपयोग, फर्जी सर्टिफिकेट के जरिए आरक्षण का लाभ लेने जैसे कई आरोप लगे थे। उन सभी शिकायतों की जांच के लिए इस जांच कमेटी का गठन किया गया था।
संसद में क्यों हुआ IAS पूजा खेडकर का जिक्र?
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) की राज्यसभा सदस्य फौजिया खान ने लोक सेवा परीक्षाओं में दिव्यांग उम्मीदवारों को पेश आ रही चुनौतियों का मुद्दा बृहस्पतिवार को उच्च सदन में उठाया।
उच्च सदन में शून्यकाल में इसके महत्व को रेखांकित करने के लिए खान ने मांसपेशीय दुर्विकास (मस्कुलर डिस्ट्रॉफी) से पीड़ित एक उम्मीदवार कार्तिक कंसल के सामने आई कठिनाइयों का हवाला दिया, जिन्होंने चार बार संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं को पास किया।
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IAS पूजा खेडकर का जिक्र करते हुए क्या कहा?
उन्होंने कहा, ‘‘एक तरफ हम पूजा खेडकर को देखते हैं जो यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) की परीक्षा पास कर लेती हैं और झूठे दस्तावेजों के आधार पर पोस्टिंग हासिल कर लेती हैं। दूसरी तरफ, हम एक कार्तिक कंसल को देखते हैं जो चार बार यूपीएससी परीक्षा पास करता है और फिर भी सेवा से वंचित हो जाता है। कारण... मस्कुलर डिस्ट्रॉफी की उनकी शारीरिक विकलांगता।’’
खान ने कहा कि कंसल की यूपीएससी रैंक 2021 में ही उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिए योग्य बना सकती थी लेकिन उस समय पात्र शर्तों की सूची में मस्कुलर डिस्ट्रॉफी को मान्यता नहीं दी गई थी।उन्होंने कहा, ‘‘सिविल सेवा परीक्षाओं को पास करना एक उपलब्धि है। एक व्यक्ति के लिए इस उपलब्धि को कई बार हासिल करना और फिर केवल भेदभावपूर्ण प्रथाओं का सामना करना... यह व्यवस्था की कमियों की याद दिलाता है।’’