Unique Shiva Temple: भगवान शिव का ऐसा मंदिर जहां की सीढ़ियों पर चलने से निकलते हैं संगीत के सातों सुर, जानें कहां है?

देशभर के कोने-कोने में भगवान शिव के मंदिर मिल जाएंगे, लेकिन कुछ ऐसे शिवालय भी हैं जो अपने आप में अलग और बेहद खास होते हैं। ऐसे ही एक मंदिर के बारे में आज हम जानेंगे।

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Airavatesvara Temple
Airavatesvara Temple | Image: self

Airavatesvara Temple: भारत में कई ऐसे प्राचीन शिव मंदिर है जो अपने आप में ही अलग हैं। इनकी विशेषताएं इन्हें और भी ज्यादा खास बनाती हैं। ऐसा ही एक शिव मंदिर तमिलनाड़ु में स्थित हैं जो 12वीं सदी में राजराजा चोल द्वितीय ने बनवाया था। इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यहां की सीढ़ियों से संगीत की धुन निकलती है, जिसकी वजह से ये मंदिर बाकी शिव मंदिरों से अलग है। आइए आज आपको इस मंदिर के बारे में बताते हैं।

स्टोरी में आगे ये पढ़ें......

  • क्या है शिव जी के इस अनोखे मंदिर का नाम, कहां है?
  • क्या है इस मंदिर की खासियत?
  • क्या है इस शिव मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता?  

क्या है शिव जी के इस अनोखे मंदिर का नाम, कहां है?

भगवान शिव को समर्पित इस अनोखे मंदिर का नाम ऐरावतेश्वर मंदिर है। ये दक्षिणी भारत के तमिलनाड़ु राज्य में कुंभकोणम के पास दारासुरम में स्थित है। जिसे 12वीं सदी में राजराजा चोल द्वितीय ने बनवाया था। इस मंदिर को महान जीवंत चोल मंदिरों के रूप में जाना जाता है। इसके अलावा यह मंदिर यूनेस्को द्वारा वैश्विक धरोहर घोषित है। 

क्या है इस मंदिर की खासियत?

इस मंदिर की बेहद दिलचस्प चीज है यहां की सीढ़ियां जो इसे और भी ज्यादा खास बनाती है। मंदिर के एंट्री वाले द्वार पर एक पत्थर की सीढ़ी बनी हुई है, जिसके हर कदम पर अलग-अलग ध्वनि निकलती है। इस सीढ़ियों के जरिए औप संगीत के सातों सुर सुन सकते हैं। इसके लिए आपको लकड़ी या पत्थर से ऊपर से लेकर नीचे तक रगड़ना पड़ेगा। किसी चीज टकराने से सीढ़ी से संगीत के स्वर निकलते हैं। इसके अलावा मंदिर की दीवारों, छतों पर आकर्षक नक्काशी का खूबसूरत प्रयोग किया गया है। पत्थरों पर की गई नक्काशी बहुत ही शानदार है।

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क्या है इस शिव मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता? 

इस मंदिर से जुड़ी पौराणिक मान्यता भी है। कहा जाता है कि भगवान इंद्र की सवारी ऐरावत हाथी सफेद था लेकिन ऋषि दुर्वासा के श्राप के कारण उसका रंग बदल गया जिससे वह बहुत दुःखी था। जिसके बाद ऐरावत हाथी ने भगवान शिव की पूजा की और उसने इस मंदिर के पवित्र जल में स्नान किया जिससे उसने अपना सफेद रंग वापस पा लिया। यही वजह है कि इस मंदिर का नाम ऐरावतेश्वर मंदिर है। 

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ अलग-अलग सूचना और मान्यताओं पर आधारित है। REPUBLIC BHARAT इस आर्टिकल में दी गई किसी भी जानकारी की सत्‍यता और प्रमाणिकता का दावा नहीं करता है।

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Published By :
Sadhna Mishra
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