Twisha Sharma death case: ट्विशा शर्मा की सास गिरिबाला सिंह किसी भी वक्त हो सकती हैं गिरफ्तार, 4 घंटे से CBI की 2 टीम कर रही पूछताछ

मॉडल और एक्टर ट्विशा शर्मा मौत केस में सीबीआई ने उसकी सास गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। सीबीआई आज सुबह से ही गिरिबाला के घर पर उनसे पूछताछ कर रही थी और अब जाकर उन्‍हें अरेस्‍ट किया गया है।

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Twisha Sharma death case CBI may arrest mother in law Giribala Singh dowry harassment evidence tampering
Twisha Sharma death case: ट्विशा शर्मा की सास गिरिबाला सिंह किसी भी वक्त हो सकती हैं गिरफ्तार, 4 घंटे से CBI की 2 टीम कर रही पूछताछ | Image: Republic

मॉडल और एक्टर ट्विशा शर्मा मौत केस में सीबीआई ने उसकी सास गिरिबाला सिंह को गिरफ्तार कर लिया है। सीबीआई आज सुबह से ही गिरिबाला के घर पर उनसे पूछताछ कर रही थी और अब जाकर उन्‍हें अरेस्‍ट किया गया है। आपको बता दें कि भोपाल पुलिस से केस लेने के बाद सीबीआई ने नई एफआईआर दर्ज की थी। इसमें दहेज हत्या का केस दर्ज करके जांच पड़ताल की जा रही है।

सीबीआई ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2), 85, 3(5) के साथ-साथ दहेज निषेद अधिनियम के सेक्शन 3 और 4 के तहत एफआईआर दर्ज की है। 25 मई 2026 को दर्ज एफआईआर के मुताबिक, ट्विशा और समर्थ की शादी 9 दिसंबर 2025 को हुई थी। शादी के बाद से उनकी सास गिरिबाला सिंह समेत पूरे परिवार पर दहेज के लिए प्रताड़ित करने का आरोप लगा है।

कोर्ट ने आदेश में क्या कहा है?

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने बुधवार को गिरिबाला सिंह की अग्रिम जमानत रद्द करने संबंधी याचिकाओं को स्वीकार कर लिया था। न्यायमूर्ति देवनारायण मिश्रा ने अपने 17 पृष्ठों के आदेश में कहा कि मामले के तथ्य और प्रतिवादी गिरिबाला सिंह पर लगाए गए आरोपों को देखते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश द्वारा दी गई अग्रिम जमानत निरस्त किए जाने योग्य है।

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'गिरिबाला सिंह ने सबूतों को प्रभावित करने की कोशिश की'

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याचिकाकर्ताओं ने हाईकोर्ट में यह भी आरोप लगाया कि अग्रिम जमानत मिलने के बाद गिरिबाला सिंह ने सबूतों को प्रभावित करने की कोशिश की। अदालत में दी गई दलीलों के अनुसार, पुलिस ने 13 मई को गिरिबाला सिंह के घर से सीसीटीवी फुटेज जब्त किए थे, लेकिन बाद में चुनिंदा क्लिप सोशल मीडिया पर प्रसारित किए गए, जिससे जांच को प्रभावित करने का प्रयास किया गया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि मामले के आरोपों और परिस्थितियों को देखते हुए ट्रायल कोर्ट को अग्रिम जमानत देने से पहले साक्ष्यों का अधिक गंभीरता से परीक्षण करना चाहिए था।

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Published By:
 Ankur Shrivastava
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