West Bengal: चुनाव हारते ही ममता बनर्जी की TMC में बगावत? सांसद काकोली घोष ने जिलाध्यक्ष पद छोड़ा, I-PAC पर फोड़ा ठीकरा, कहा- वो PM से भी...
West Bengal news: TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बारासात जिला अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने I-PAC पर सही तरीके से काम करने और कार्यकर्ताओं से बदतमीजी करने का आरोप लगाया।
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West Bengal news: पश्चिम बंगाल चुनाव में तृणमूल कांग्रेस (TMC) की करारी हार के बाद से ही अंदरूनी संकट बढ़ता जा रहा है। कई नेताओं ने बगावती तेवर अपना लिए हैं। TMC सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने बारासात जिला अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया है। अब उन्होंने चुनावी रणनीतिकार कंपनी आई-पैक (I-PAC) पर कई गंभीर आरोप लगाए और उनके कामकाज के तरीके पर सवाल उठाए हैं।
'हमारे कार्यकर्ता कोई नौकर नहीं…'
सांसद ने कहा कि I-PAC के काम करने का तरीका बिल्कुल भी ठीक नहीं था। वे बहुत ही बदतमीजी से बात करते थे। हमारे कार्यकर्ता कोई नौकर नहीं हैं। हम इन्हें कोई तनख्वाह नहीं देते, ये ममता दीदी और पार्टी के प्रति अपने प्यार की वजह से काम करते हैं। उन्होंने लोगों के साथ बहुत बुरा बर्ताव किया। उनका घमंड इतना बढ़ गया कि आखिर में उन्होंने हमारे साथ भी बुरा बर्ताव करना शुरू कर दिया। I-PAC को ऐसा लगता था कि वे प्रधानमंत्री से भी ज्यादा ऊंचे पद पर हैं।
काकोली ने यह भी दावा किया कि मुझे नहीं लगता कि ये सीधे तौर पर उनके (ममता बनर्जी के) नियंत्रण में था, क्योंकि I-PAC एक अलग संस्था है। उन्होंने I-PAC पर मनमाने तरीके से काम करने का भी आरोप लगाया।
हार की बताई ये वजहें
काकोली ने कहा कि बारासात लोकसभा क्षेत्र की सात विधानसभा सीटों में से पांच पर टीएमसी हार गई। इसका मुख्य कारण सत्ता विरोधी लहर और मतदाता सूचियों के विशेष गहन संशोधन का जमा हुआ असर है।
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इस्तीफे पर मचा बवाल
काकोली ने यह भी कहा कि उन्होंने नैतिक आधार पर इस्तीफा दिया है। एक अध्यक्ष के तौर पर हार की उनकी जिम्मेदारी बनती है। वहीं, TMC सांसद सौगत रॉय ने काकोली के इस कदम को अनैतिक बताया है। उन्होंने कहा कि काकोली को टीएमसी संसदीय दल के मुख्य सचेतक पद से हटाए जाने के कारण शिकायत थी। यह नैतिक रूप से गलत है क्योंकि जब पार्टी मुश्किल में हो, तब ऐसे कदम नहीं उठाने चाहिए जिनसे पार्टी को नुकसान पहुंचे। उन्हें जनता को स्पष्टीकरण देना होगा।