TMC को बचाने के लिए ममता बनर्जी लगा रही एड़ी-चोटी का जोर; आवास पर बुलाई विधायकों की बैठक; बागियों को भी मिलाया फोन
करीब तीन दशक पुरानी पार्टी तृणमूल कांग्रेस इतिहास में पहली बार सबसे बड़े आंतरिक संकट का सामना कर रही है। अब पार्टी को टूटने से बचाने के लिए ममता बनर्जी एड़ी-चोटी का जोड़ लगा रही है।
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पश्चिम बंगाल 2026 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने बंपर जीत हासिल कर प्रदेश में अपनी सरकार बना ली। इधर हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। पार्टी के अंदर सियासी संकट गहराता ही जा रहा है। पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के सामने अब इतिहास का सबसे बड़ा विद्रोह खड़ा हो गया है। ऐसे में ममता बनर्जी पार्टी को बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोड़ लगा रही है। सूत्रों के मुताबिक आज एक फिर उन्होंने अपने आवास पर विधायकों की बैठक बुलाई है।
TMC के भीतर चल रहे बड़े पैमाने पर राजनीतिक विद्रोह की चर्चा बंगाल में ही नहीं पूरे देश में चल रही है। करीब तीन दशक पुरानी तृणमूल कांग्रेस इतिहास में पहली बार सबसे बड़े आंतरिक संकट का सामना कर रही है। बागी खेमे ने साफ संकेत दे दिया है कि वह अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार करने को तैयार नहीं है। इधर ममता बनर्जी टूकड़ों में बंट रही पार्टी को संभालने की कवायत तेज कर दी है।
ममता बनर्जी ने बुलाई अहम बैठक
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, TMC सुप्रीमो और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आज, शुक्रवार को कालीघाट स्थित अपने आवास पर विधायकों की बैठक बुलाई है। उन्होंने इस बैठक के लिए कई बागी विधायकों को भी फोन मिलाया है। हालांकि, उनसे से क्या बातचीत हुई है उसकी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। बैठक में कितने विधायक शामिल होते हैं, ये देखने वाली बात होगी। बता दें कि इससे पहले भी ममता बनर्जी द्वारा बुलाई गई बैठक में बड़ी संख्या में विधायकों के अनुपस्थित रहने की घटनाएं हो चुकी हैं।
ऋतब्रत बनर्जी को 58 विधायकों का समर्थन
इधर, विधानसभा में विपक्ष के नेता पद की औपचारिक मान्यता मिलने के बाद ऋतब्रत बनर्जी ने गुरुवार को 58 विधायकों के साथ बैठक की। इस बैठक को TMC के अंदरूनी कलह का सबसे ताजा और सबसे बड़ा प्रदर्शन माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, बागी विधायकों का एक बड़ा वर्ग अब ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में संगठित हो रहा है और पार्टी के वर्तमान नेतृत्व से खुलकर असंतोष जता रहा है।
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बागियों पर बरसी महुआ मोइत्रा
वहीं, सांसद महुआ मोइत्रा ने गुरुवार को पार्टी के विधायकों के अलग हुए गुट पर तीखा हमला करते हुए उन पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन करके मतदाताओं के साथ विश्वासघात करने का गंभीर आरोप लगाया। मोइत्रा ने इस बात पर जोर दिया कि बागी विधायकों ने ममता बनर्जी के नेतृत्व और नाम पर ही अपनी सीटें जीतीं और उन्हें भाजपा विरोधी वोट मिले। उन्होंने बताया कि टीएमसी ने पार्टी के चिन्ह और ममता बनर्जी के नाम पर 41% वोट हासिल किए।