कई वर्षों तक चले सहमति आधारित संबंधों के मामले में तुरंत गिरफ्तारी न हो, पहले जांच जरूरी- पूर्व CJI यूयू ललित

Former CJI UU Lalit: इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्य न्यायाधीश यू.यू. ललित (उदय उमेश ललित) ने कहा कि कई वर्षों तक चले सहमति-आधारित संबंधों को बाद में झूठे विवाह वादे पर बलात्कार के मामलों में बदल देने की प्रवृत्ति पर पुलिस को संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।

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Former CJI UU Lalit
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश यू.यू. ललित | Image: रिपब्लिक

Former CJI UU Lalit: नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित ‘द एकम न्याय कॉन्फ्रेंस: शेपिंग एन इक्वल ऐंड जस्ट भारत’ में देश की न्याय व्यवस्था, कानूनों के दुरुपयोग और पुरुषों से जुड़े सामाजिक-कानूनी मुद्दों पर गंभीर चर्चा हुई। कार्यक्रम का आयोजन अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस (19 नवंबर) के संदर्भ में किया।

इस खास कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश यू.यू. ललित मुख्य अतिथि थे। उन्होंने इस खास मौके पर कहा कि न्याय प्रणाली का मूल स्वभाव “निष्पक्ष” होना चाहिए। निर्दोष को बचाना और वास्तविक पीड़ितों को न्याय देना उसकी पहली जिम्मेदारी है।

ऐसे मामलों में तुरंत गिरफ्तारी न हो, पहले जांच हो - पूर्व CJI यूयू ललित

इस कार्यक्रम में पूर्व मुख्य न्यायाधीश यू.यू. ललित (उदय उमेश ललित) ने कहा कि कई वर्षों तक चले सहमति-आधारित संबंधों को बाद में झूठे विवाह वादे पर बलात्कार के मामलों में बदल देने की प्रवृत्ति पर पुलिस को संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, “ऐसे मामलों में तुरंत गिरफ्तारी न हो, पहले जांच हो।”

न्यायमूर्ति ललित ने दोहराया कि कानूनों के दुरुपयोग पर चर्चा महिलाओं के अधिकारों पर हमला नहीं, बल्कि न्याय की मांग है।

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कोई महिला झूठा आरोप क्यों लगाएगी,इस भ्रम से बाहर आने की जरूरत - न्यायमूर्ति साधना जाधव

वहीं, कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि, बॉम्बे हाई कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति साधना जाधव ने कहा कि समाज को इस भ्रम से बाहर आना चाहिए कि “कोई महिला झूठा आरोप क्यों लगाएगी।” उन्होंने कहा, “सवाल है, क्यों नहीं?” उन्होंने बताया कि झूठे आरोपों का नुकसान सिर्फ आरोपी पुरुष को नहीं, उसके बच्चों, माता-पिता और पूरे परिवार को झेलना पड़ता है।

सम्मेलन में वकीलों, मनोवैज्ञानिकों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और नीति-निर्माताओं ने पुरुषों की मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं, बढ़ती आत्महत्याओं, माता-पिता से बच्चों की दूरी (पैरेंटल एलियनेशन), बलात्कार कानून के दुरुपयोग और भारत में प्री-नप्चुअल एग्रीमेंट की आवश्यकता जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की।
पूर्व अतिरिक्त निदेशक (प्रॉसिक्यूशन), यूपी सरकार, सत्य प्रकाश राय ने कहा, “पीड़ितों का कोई गैंग नहीं होता।” यह पंक्ति पुरुष पीड़ितों के अकेलेपन और सामाजिक समर्थन की कमी की ओर संकेत करती रही।

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Published By:
 Amit Dubey
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