हवाई किराये के नियमन के लिए एआई आधारित निगरानी प्रणाली हो : संसदीय समिति

संसद की एक समिति ने हवाई किराये की कड़ी निगरानी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित 'सख्त' नियमन तंत्र की अनुशंसा करते हुए कहा है कि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के तहत मौजूदा नियामक प्रणाली में दक्षता का अभाव है।

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 kolkata airport
एयरपोर्ट | Image: PTI

संसद की एक समिति ने हवाई किराये की कड़ी निगरानी के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित 'सख्त' नियमन तंत्र की अनुशंसा करते हुए कहा है कि नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) के तहत मौजूदा नियामक प्रणाली में दक्षता का अभाव है। परिवहन, पर्यटन और संस्कृति संबंधी स्थायी समिति ने अपनी 375वीं रिपोर्ट ‘नागर विमानन मंत्रालय की अनुदान की मांगों (2025-26) में यह भी अनुशंसा की है कि डीजीसीए को अनुचित गतिविधियों में लिप्त विमानन कंपनियों पर जुर्माना लगाने के लिए अर्ध-न्यायिक शक्तियां दी जानी चाहिए।

जनता दल (यूनाइटेड) के राज्यसभा सदस्य संजय कुमार झा की अध्यक्षता वाली समिति ने निर्वाचन आयोग के ‘सी-विजिल’ मोबाइल ऐप की तर्ज पर ‘एयरफेयर विजिल’ ऐप विकसित करने की भी सिफारिश की है ताकि लोग ‘‘मनमाने हवाई किराये’’ के संबंध में शिकायतें कर सकें।

रिपोर्ट के अनुसार, कार्यान्वयन की समयसीमा 18-24 महीने होनी चाहिए, जिसमें प्रथम चरण में छह महीने के भीतर अधिक यातायात वाले मार्गों पर ध्यान केंद्रित किया जाए और 2026 तक देश भर में लागू कर दिया जाए। संसद में पेश रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘समिति ने 2025-26 के लिए नागर विमानन मंत्रालय की अनुदान मांगों की पड़ताल करते हुए, एआई-आधारित पूर्वानुमान निगरानी प्रणाली के ढांचे के तहत सख्त हवाई किराया मूल्य निर्धारण नियमन तंत्र की स्थापना की सिफारिश की है। अस्थायी रूप से इसका नाम ‘एयरप्राइस गार्डियन’ रखा गया है।’’

इसमें कहा गया है कि इस प्रणाली का उद्देश्य अप्रत्याशित और ‘‘हवाई किराये में अत्यधिक वृद्धि’’ से संबंधित उपभोक्ता शिकायतों का समाधान करना होगा, विशेष रूप से यात्रा की व्यस्त अवधि और आपात स्थितियों के दौरान। साथ ही, यह किराया निर्धारण में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करेगी।

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समिति ने कहा कि डीजीसीए के तहत मौजूदा नियामक प्रणाली में हवाई किराये के रुझानों की सक्रिय निगरानी और नियमन करने की दक्षता का अभाव है, जिसके लिए उन्नत प्रौद्योगिकी का लाभ उठाते हुए एक परिवर्तनकारी दृष्टिकोण की आवश्यकता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रस्तावित ‘‘एयरप्राइस गार्डियन’’ प्रणाली पूर्व के डेटा, मांग पैटर्न, ईंधन लागत, किराये में मौसमी उतार-चढ़ाव और त्योहारों या आपात स्थितियों जैसे बाहरी कारकों के आधार पर हवाई किराये के रुझान का पूर्वानुमान करने के लिए ‘मशीन लर्निंग एल्गोरिदम’ और पूर्वानुमान विश्लेषण का उपयोग करेगी।

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समिति ने सिफारिश की है, ‘‘डीजीसीए को अनुचित गतिवधियों में लिप्त एयरलाइनों पर जुर्माना लगाने के लिए अर्ध-न्यायिक शक्तियां दी जानी चाहिए।’’ इसके अलावा, रिपोर्ट में कहा गया है कि एयरलाइनों को उचित मूल्य निर्धारण मानदंडों के पालन के आधार पर रेटिंग देने के लिए ‘‘मूल्य निर्धारण पारदर्शिता सूचकांक’’ तैयार किया जाना चाहिए। क्षेत्रीय हवाई संपर्क योजना (उड़ान) पर मंत्रालय के जोर दिये जाने के संदर्भ में समिति ने कहा कि हवाई किराये की निगरानी कम उड़ानों वाले मार्गों तक विस्तारित की जानी चाहिए, ताकि अत्यधिक किराये पर रोक लगाई जा सके।

Published By:
 Nidhi Mudgill
पब्लिश्ड