अपडेटेड 25 February 2025 at 22:11 IST
बिहार में और अधिक समावेशी स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित किए जाने की जरूरत : मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि बिहार सरकार ने चिकित्सा के बुनियादी ढांचे के समग्र विकास के लिए बहुत कुछ किया है लेकिन राज्य में और अधिक समावेशी स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित किए जाने की जरुरत है।
- भारत
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को कहा कि बिहार सरकार ने चिकित्सा के बुनियादी ढांचे के समग्र विकास के लिए बहुत कुछ किया है लेकिन राज्य में और अधिक समावेशी स्वास्थ्य सुविधाएं विकसित किए जाने की जरुरत है।
राष्ट्रपति ने यहां बापू सभागार में पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (पीएमसीएच) के शताब्दी समारोह को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘एक समय था जब बिहार के चिकित्सकों का देश-विदेश में नाम था। लोग दूर-दूर से इलाज के लिए यहां आते थे। बीच के कुछ कालखंड में यहां से अच्छे चिकित्सकों का पलायन हुआ। इस कारण लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा के लिए राज्य से बाहर जाने को मजबूर होना पड़ता है। चिकित्सा के लिए दूसरे शहर या राज्य में जाने से कई समस्याएं पैदा होती हैं। जहां इलाज मिलने में देरी होती है, वहीं परदेस में रहने और खाने की भी समस्या उत्पन्न हो जाती है। रोगियों के परिजनों के रोजगार पर भी असर पड़ता है। बड़े शहरों के चिकित्सा संस्थानों पर भी दबाव बढ़ता है। अच्छे चिकित्सा संस्थानों का देश भर में विकेन्द्रीकरण इन सभी समस्याओं को दूर करने में सहायक सिद्ध होगा। चेन्नई, हैदराबाद, मुंबई और इंदौर जैसे शहर स्पेशियेलिटी ट्रीटमेंट के केंद्र के रूप में विकसित भी हुए हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि बिहार में भी ऐसे अनेक केंद्र विकसित किए जाने की आवश्यकता है। इससे न केवल लोगों को यहीं पर अच्छी चिकित्सा मिलेगी बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा। इस कार्य में पीएमसीएच और इसके पूर्व विद्यार्थी अपने अनुभव से बड़ा योगदान दे सकते हैं और बिहार के गौरवशाली अतीत को वापस ला सकते हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मुझे खुशी है कि बिहार सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार के लिए अनेक उल्लेखनीय प्रयास किए हैं। पीएमसीएच के पुनर्विकास की योजना भी इनमें से एक कदम है। मुझे बताया गया है कि पुनर्विकसित पीएमसीएच आधुनिक सुविधाओं और तकनीक से युक्त होगा और पूरी तरह तैयार होने पर बेड की संख्या की दृष्टि से दुनिया के विशालतम अस्पतालों में से एक होगा।’’
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मुर्मू ने कहा, ‘‘आज का युग तकनीक का युग है। चिकित्सा के क्षेत्र में भी तकनीक अहम भूमिका निभा रही है। कृत्रिम बुद्धिमता (एआई) और रोबोटिक्स जैसी तकनीकें चिकित्सा प्रक्रिया को अधिक सरल और सटीक बना रहे हैं। मेरी इस संस्थान से जुड़े सभी लोगों से अपील है कि आप आधुनिकतम तकनीकों को अपनाने के लिए सदैव तत्पर रहें। इससे न केवल रोगियों का इलाज सुगम होगा बल्कि आपके ज्ञान और कार्यक्षमता में भी वृद्धि होगी।’’
उन्होंने कहा, ‘‘किसी भी संस्थान के निरंतर विकास में उस संस्थान के शिक्षकों और विद्यार्थियों द्वारा किए जा रहे शोध महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। मुझे यह जानकर प्रसन्नता हुई है कि पीएमसीएच में अनुसंधान और विकास को प्रोत्साहित किया जाता है। कालाजार और बोन टीबी पर यहां किए गए शोध को दुनिया भर में मान्यता मिली है। तकनीक के माध्यम से दुनिया के किसी भी कोने से शिक्षा, शोध और इलाज में उस क्षेत्र के विशेषज्ञ से सहायता ली जा सकती है। पीएमसीएच के पूर्व छात्र एक ऐसा तंत्र बना सकते हैं जिसमें वे अपने शोध और समस्या पर चर्चा कर सकें। इससे न केवल चिकित्सकों को बल्कि रोगियों को भी लाभ होगा।’’
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राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘आप सब जानते हैं कि कैंसर दुनिया भर में मौत के प्रमुख कारणों में से एक है। मेरा मानना है कि इस बीमारी से लड़ने में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाना, इसके उपचार की सुविधाओं का विकेन्द्रीकरण करना और शोध को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण है। मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि पिछले वर्ष अप्रैल में, भारत की पहली स्वदेश में विकसित सीएआर-टी सेल थेरेपी का शुभारंभ करने का सौभाग्य मुझे मिला था। यह थेरेपी आईआईटी मुंबई, टाटा मेमोरियल अस्पताल और इम्युनोएक्ट के बीच सहयोग से विकसित की गयी है। पीएमसीएच जैसे बड़े संस्थानों से मेरा आग्रह है कि आप अन्य संस्थानों के सहयोग से न केवल कैंसर बल्कि अन्य रोगों के इलाज के लिए नए-नए रिसर्च करें।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे चिकित्सक, शोधकर्ता और शिक्षक होने के साथ-साथ एक परामर्शदाता भी होते हैं। इन सभी भूमिकाओं में वे लोगों और समाज की सेवा करते हुए राष्ट्र निर्माण में भी अपना योगदान देते हैं। आप सब जानते हैं कि दुर्घटना की स्थिति में कई बार मरीज के परिजन तुरंत आवश्यकतानुसार रक्त दान करने की स्थिति में नहीं होते हैं। रक्त दाता नहीं मिलने के कारण वे अधिक तनाव में आ जाते हैं। ऐसी समस्याओं के समाधान में नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान महत्वपूर्ण है। मुझे बताया गया है कि पीएमसीएच के शिक्षक और विद्यार्थी नियमित रूप से रक्त दान शिविर का आयोजन करते हैं।’’
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘रक्त दान के साथ-साथ अंगदान भी महत्वपूर्ण हैं। यह प्रसन्नता का विषय है कि पीएमसीएच गैर सरकारी संगठनों के साथ मिल कर इस दिशा में कार्य कर रहा है। अंगदान के बारे में जागरूकता फैलाने की और भी अधिक आवश्यकता है जिसमें चिकित्सक अहम भूमिका निभा सकते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘पीएमसीएच का आदर्श वाक्य है ‘‘सर्वे सन्तु निरामया, और कॉलेज गान है ‘‘सेवा धर्म हमारा’’ जो आप लोगों को मानवता की सेवा करने की प्रेरणा देता है। मुझे विश्वास है कि इस संस्थान से जुड़े लोग निस्वार्थ भाव, दृढ़ संकल्प और समर्पण के साथ सेवा धर्म का पालन करते रहेंगे और इस संस्थान की प्रतिष्ठा को नई ऊंचाइयों पर ले जाएंगे। मेरी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।’’
उल्लेखनीय है कि प्रिंस ऑफ वेल्स मेडिकल कॉलेज जिसे अब पीएमसीएच के नाम से जाना जाता है, की स्थापना 25 फरवरी, 1925 को हुई थी।
राष्ट्रपति मंगलवार को दो दिवसीय बिहार दौरे पर पहुंची। राष्ट्रपति सुबह करीब 11.45 बजे पटना हवाई अड्डे पर उतरीं और समारोह में शामिल होने के लिए सीधे गांधी मैदान के पास बापू सभागार में चली गयीं।
बिहार के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने हवाई अड्डे पर राष्ट्रपति का स्वागत किया।
राष्ट्रपति के बिहार दौरे के मद्देनजर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किये गये हैं।
इस अवसर पर बिहार के राज्यपाल, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और राज्य सरकार के कई अन्य मंत्री भी मौजूद रहे।
राष्ट्रपति बुधवार को छतरपुर (मध्यप्रदेश) के लिए रवाना होंगी।
Published By : Kanak Kumari Jha
पब्लिश्ड 25 February 2025 at 22:11 IST