यह सरकार किसानों की जमीन कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को देना चाहती है: सपा सांसद

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद धर्मेंद्र यादव ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि वह अन्नदाता की जमीन कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को देना चाहती है और उनके लिए ‘दिल में नफरत लेकर बैठी है’।

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Dharmendra Yadav
धर्मेंद्र यादव | Image: Republic

समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद धर्मेंद्र यादव ने शुक्रवार को केंद्र सरकार पर किसानों को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए दावा किया कि वह अन्नदाता की जमीन कुछ चुनिंदा उद्योगपतियों को देना चाहती है और उनके लिए ‘दिल में नफरत लेकर बैठी है’। लोकसभा में वित्त वर्ष 2025-26 के लिए कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के नियंत्रणाधीन अनुदानों की मांगों पर चर्चा की शुरुआत करते हुए यादव ने कहा कि यह सरकार और इसके मंत्री किसानों के लिए बड़े-बड़े भाषण देते हैं लेकिन हकीकत यह है कि ये लोग ‘‘किसानों के लिए दिल में नफरत लेकर बैठे हैं।’’ सपा सांसद ने आरोप लगाया कि सरकार चाहती है कि किसान परेशानी में उलझे रहें और किसी भी तरह बर्बाद हो जाएं।

उन्होंने कहा, ‘‘भाजपा के लोगों की किसानों की जमीन पर नजर है। सरकार उनकी जमीन चुनिंदा उद्योगपतियों को देना चाहती है। सरकारी बैंकों का निजीकरण किया जा रहा है ताकि किसानों को निजी बैंकों से कर्ज लेना पड़े। आज बिना कर्ज लिए किसान खेती नहीं कर सकता।’’यादव ने दावा किया कि इस बार बजट में कृषि मंत्रालय की हिस्सेदारी केवल 2.7 प्रतिशत रखी गई है और पिछले कृषि बजट की तुलना में इसमें 2.8 प्रतिशत की कमी की गई है। उन्होंने कहा कि 2014 के चुनावी संकल्प पत्र में भाजपा ने किसानों के लिए बड़े-बड़े वादे किए थे, लेकिन आज तक एक भी वादा पूरा नहीं किया है, वहीं 2022 में किसानों की आय दोगुनी करने का प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का वादा भी आज तक अधूरा है।

यादव ने कहा कि किसानों से संबंधित सभी जरूरी वस्तुओं के दाम बढ़ते जा रहे हैं लेकिन उनकी आय बढ़ाने के लिए कोई काम नहीं हुआ। उन्होंने दावा किया कि इस सरकार के दस साल के कार्यकाल में हर साल 10 हजार से ज्यादा अैर अब तक एक लाख से ज्यादा किसानों ने खुदकुशी कर ली है। यादव ने केंद्र सरकार द्वारा वापस लिए जा चुके तीन विवादित कृषि कानूनों का जिक्र करते हुए कहा कि इन कानूनों के खिलाफ आंदोलन में ‘‘शहीद हुए 750 किसानों को आज तक मुआवजा नहीं दिया गया।’’ उन्होंने कहा कि यह सरकार कुछ चुनिंदा पूंजीपतियों का 16 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कर्ज माफ कर देती है, लेकिन किसानों के कर्ज की माफी की बात आती है तो चुप बैठ जाती है।

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यादव ने कहा, ‘‘ये गुमराह करते हैं कि किसानों का कर्ज माफ करेंगे तो बहुत आर्थिक बोझ सरकारी खजाने पर आएगा। मेरा दावा है कि ज्यादा बोझ नहीं आएगा।’ उन्होंने उत्तर प्रदेश में आवारा पशुओं से खेती और फसलों को होने वाले नुकसान का उल्लेख करते हुए सरकार से इसके स्थायी समाधान की मांग की। यादव ने कहा कि केंद्र सरकार को किसानों की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी की मांग को प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एम एस स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के आधार पर पूरा करना चाहिए। सपा सांसद ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती सपा सरकार में पांच साल में गन्ने का समर्थन मूल्य 90 रुपये बढ़ाया गया था, जबकि इस सरकार ने आठ साल में केवल 30 रुपये बढ़ाया है।

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Published By:
 Ankur Shrivastava
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