Dhirendra Shastri: तौकीर रजा ने डाला आग में घी, कहा-बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी लेकिन दिवाली पर...

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दीपावली पर जलाए जाने वाले पटाखों के बयान पर अब मौलाना तौकीर रजा ने अपनी नई दलील पेश की है।

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 Tauqeer Raza On Dhirendra Shastri
धीरेंद्र शास्त्री और तौकीर रजा | Image: PTI/Republic

Tauqeer Raza On Dhirendra Shastri:  बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के दीपावली (Deepawli 2024) पर जलाए जाने वाले पटाखों के बयान पर अब  मौलाना तौकीर रजा ने प्रतिक्रया दी है। अपने बयान के जरिए तौकीर रजा ने इशारों-इशारों में धीरेंद्र शास्त्री पर हमला भी बोला है साथ ही उन्होंने यह भी कह डाला कि अगर आपकी खुशी का इजहार करने में वातावरण में प्रदूषण फैलता है तो वह खुशी का इजहार नहीं करना चाहिए।


पंडित धीरेंद्र शास्त्री (Dhirendra Krishna Shastri) के पटाखे पर दिए गए बयान पर मौलाना तौकीर रजा (Maulana Tauqeer Raza) ने कहा दीपावली रोशनी का त्यौहार है ना की धमाकों और पटाखों का त्यौहार है। अगर आपकी खुशी का इजहार करने में वातावरण में प्रदूषण फैल रहा है तो  वह खुशी का इजहार दरअसल खुशी नहीं कहलाएगी। अगर किसी की खुशी से जान-माल की हानि हो रही है तो उसे पर सख्ती करना बेहद जरूरी है। उन्होंने पटाखों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की बात नहीं कही, मगर इसके लिए सीमा तय करने की दलील दी है।

तौकीर रजा ने पटाखों जलाने के लेकर दी ये दलील

तौकीर ने रजा ने प्रदूषण ( Pollution ) का हवाला देते हुए कहा कि पर्यावरण का भी तो ख्याल रखना होगा, उसे नुकसान ना हो। उन्होंने ये भी कहा कि शब-ए-बारात में मुस्लिम समाज के लोग आतिशबाजी करते हैं। मगर हमारे उलेमा ने इसपर पाबंदी लगाई है। वहीं, बकरीद पर दी जाने वाली कुर्बानी पर दलील देते हुए मौलाना ने कहा कि बकरीद पर जानवरों की कुर्बानी दी जाती है लेकिन दीपावली पर होने वाले पॉल्यूशन से इंसानों को नुकसान हो रहा है। दोनों में फर्क है।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बकरीद की कुर्बानी को लेकर क्या कहा?

बता दें कि बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बीते दिनों कहा था कि बकरीद पर लाखों बकरे कट सकते हैं उनकी कुर्बानी पर प्रतिबंध नहीं है तो फिर पटाखे प्रतिबंध क्यों लगाना चाहिए? उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा था कि जब भी हिंदू त्योहार आते हैं तो किसी न किसी के द्वारा स्टेटमेंट जारी किए जाते हैं, जब होली आती है तो कहा जाता है कि रंगों से ना खेली पानी बर्बाद होता है, दिवाली आती है तो पटाखे ना चलाएं पटाखों पर प्रतिबंध लगाए जाते हैं, प्रदूषण होता है, लेकिन जब दूसरे समुदाय का त्योहार होते हैं तब उन पर कोई टिप्पणी क्यों नहीं करता है?

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हम तो दिवाली अच्छे से मनाएंगे- धीरेंद्र शास्त्री

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था कि हैप्पी न्यू ईयर के नाम पर पूरी दुनिया में पटाखे जलाए जाते हैं, तब प्रदूषण नहीं होता है। दिवाली आते ही प्रदूषण हो जाता है। होली आते ही पानी खराब हो जाता है। जब खून खराबा होता तब यह लोग स्टेटमेंट नहीं देते, तब मांग नहीं करते हैं, तब यह कानून लाने की बात नहीं करते हैं। यह लोग जो दो पक्षीय या नियम लगाने की बातें करते हैं ऐसे लोगों के ऊपर यह में सुतली बम रखवाना है। हम तो दिवाली अच्छे से मनाएंगे और हमने तो सुतली बम खरीद लिया है। 

यह भी पढ़ें: धीरेंद्र शास्त्री की दो टूक- सनातन के त्योहार पर कानून का हवाला क्यों, बकरीद पर लाखों बकरे कटते...

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Published By :
Rupam Kumari
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