'संक्रमित और खतरनाक कुत्तों को 'मौत का इंजेक्शन' दिया जाए', स्ट्रे डॉग्स केस में सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 10 बड़ी बातें

सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर फिर एक बार बड़ा फैसला सुनाया है। इस फैसले के तहत संक्रमित कुत्तों को इथेनेशिया देने का आदेश दिया गया है। वहीं, बाकी फैसले बरकरार रखे गए हैं। जैसे नसबंदी-टीकाकरण भी जरूरी। पढ़ें 10 बड़ी बातें।

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‘Euthanasia, Contempt Warning & No Release Near Schools’: Top Takeaways From SC’s Landmark Stray Dog Verdict
'खतरनाक कुत्तों को दें मौत का इंजेक्शन', सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला | Image: Republic

Supreme Court Vredict on Stray Dogs Latest Update: सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों पर डॉग लवर्स की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने नसबंदी, टीकाकरण, सार्वजनिक जगहों पर उन्हें खाना न खिलाने जैसे अपने आदेश को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (19 मई) को अपने फैसले को तीन हिस्सों में विभाजित करके बड़ा आदेश सुनाया, कोर्ट ने अपने पुराने फैसले में खूंखार कुत्तों के लिए शेल्टर होम बनाने, सरकारी संस्थानों से आवारा कुत्तों को हटाने और खुली जगह पर उन्हें खाना खिलाने से रोक का आदेश दिया था।

क्या है आवारा कुत्तों पर ABC रूल?

अदालत ने कहा कि देश भर में कुत्ता काटने की घटनाओं को सुप्रीम कोर्ट अनदेखा नहीं कर सकती। इसमें बच्चों, महिलाओं को बुरी तरह घायल किया गया है, अदालत इस बात को नहीं भूल सकती कि एबीसी रूल 2001 में लागू किया गया था। आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी के अनुपात में शेल्टर होम और बाकी सुविधाओं का विकास नहीं हो पाया है। पागल, लाइलाज बीमारी या खूंखार कुत्तों को कानूनी दायरे में मारा जा सकता है। अदालत ने कहा कि गरिमापूर्ण जीवन जीने के अधिकार में कुत्ते के काटने से होने वाले नुकसान के डर के बिना स्वतंत्र रूप से जीने का अधिकार भी शामिल है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की 10 बड़ी बातें (Supreme Court Verdict on Stray Dogs)

आवारा कुत्तों की स्टरलाइजेशन (नसबंदी) और टीकाकरण जरूरी।
नगर निगमों आवारा कुत्तों को पकड़कर नसबंदी, टीकाकरण का काम करेगा। 
सामान्य स्वस्थ कुत्तों को स्टरलाइजेशन और वैक्सीनेशन के बाद उसी क्षेत्र में छोड़ा जाए जहां से उन्हें पकड़ा गया था।
जहां कुत्ते लाइलाज रूप से बीमार, संक्रमित, रेबीज या बाकी बिमारियों से पीड़ित है, उन्हें मारने पर विचार कर सकते हैं। 
खतरनाक व्यवहार वाले कुत्तों के लिए अलग शेल्टर तैयार किया जाए। 
खुले स्थानों, गली या सड़क पर आवारा कुत्तों को खाना नहीं खिलाया जा सकता। 
आवारा कु्त्तों को खिलाने के लिए हर जगह फीडिंग जोन बनाया जाए, वहां बोर्ड, व्यवस्था होगी। 
स्कूल-कॉलेज अस्पताल, बस अड्डों को हटाने का निर्देश रहेगा, रेलवे स्टेशन, खेल परिसर से कुत्तों को हटाया जाए।
आवारा कुत्तों के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने का आदेश दिया है। एकसमान आवारा कुत्ते प्रबंधन नीति तैयार होगी।
आवारा कुत्तों को लेकर एबीसी फ्रेमवर्क को ठीक ढंग से राज्य सरकारें और एजेंसियां लागू करें।

क्या है स्ट्रे डॉग्स पर ABC फ्रेमवर्क

कोर्ट ने कहा कि वो आवारा कुत्तों को लेकर वो ये बात नजरअंदाज नहीं कर सकती कि ABC फ्रेमवर्क 2001 में 25 साल पहले बना था. लेकिन आवारा कुत्तों की बढ़ती आबादी के हिसाब से संसाधनों को बढ़ाने और उनकी संख्या में कमी की कोशिशें अधूरी रही हैं. संस्थाएं और एजेंसियां पर्याप्त कदम नहीं उठा पाई हैं. बिना योजना के नसबंदी और वैक्सीनेशन अभियान चलाए गए. इससे उद्देश्य पूरा नहीं हुआ. राज्य सरकारों ने दूरगामी सोच से काम किया होता तो ऐसे हालात नहीं होते. आवारा कुत्तों का आतंक चिंताजनक स्तर पर है. राजस्थान और गुजरात के उदाहरण सामने हैं.

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राजस्थान और गुजरात का उदाहरण दिया गया

आवारा कुत्तों के काटने के मामले लगातार बढ़े हैं और ये चिंताजनक स्तर पर पहुंच गए हैं। राजस्थान के श्री गंगानगर शहर में 30 दिनों में डॉग बाइट की 1084 घटनाएं दर्ज की गईं. बच्चों को गंभीर चोटें आईं हैं। चेहरे पर कुत्तों के हमले की दिल दहलाने वाली घटनाएं हुई हैं। तमिलनाडु में 4 महीनों में दो लाख से ज्यादा मामले हुए हैं।

राज्यों की जिम्मेदारी-जवाबदेही तय होगी- SC

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकारों की की जिम्मेदारियों को तय करने के लिए रूल बनाना जरूरी है। इंसान के ⁠गरिमा के साथ जीने के अधिकार में कुत्ते के काटने के हमले से होने वाले नुकसान के डर के बिना आजादी से जीने का अधिकार शामिल है। सरकारें खामोश रहकर जवाबदेही से बच नहीं सकतीं। सुप्रीम कोर्ट उन जमीनी हकीकतों से अनजान नहीं रह सकता, जहां बच्चे, विदेशी यात्री, बुज़ुर्ग कुत्ते के काटने की घटनाओं का शिकार हुए हैं।

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Published By:
 Nidhi Mudgill
पब्लिश्ड