अपडेटेड 28 February 2025 at 16:54 IST
सुप्रीम कोर्ट का गुरमीत राम रहीम की अस्थायी रिहाई के खिलाफ याचिका पर सुनवाई से इनकार
सुप्रीम कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम की अस्थायी रिहाई के खिलाफ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया।
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सुप्रीम कोर्ट ने डेरा सच्चा सौदा के प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह की अस्थायी रिहाई के खिलाफ शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति (एसजीपीसी) की याचिका पर सुनवाई करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा की पीठ के समक्ष पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली एक याचिका दायर की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के समक्ष जनहित याचिका की पोषणीयता पर डेरा सच्चा सौदा प्रमुख के वकील की आपत्ति का उल्लेख किया, जिसे न्यायालय ने इस आधार पर खारिज कर दिया कि यह एक ही व्यक्ति के खिलाफ दायर की गई थी। पीठ ने शुक्रवार को कहा, ‘‘इस मामले को देखते हुए, हम मौजूदा याचिका पर विचार करने के लिए इच्छुक नहीं हैं।’’
राम रहीम सिंह 20 वर्ष की जेल की सजा काट रहा है
राम रहीम सिंह अपनी दो शिष्याओं के साथ दुष्कर्म के मामले में 20 वर्ष की जेल की सजा काट रहा है। एसजीपीसी ने उच्च न्यायालय के अगस्त 2024 के आदेश के खिलाफ उच्चतम न्यायालय का रुख किया था। हाईकोर्ट ने एसजीपीसी की जनहित याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि यदि राम रहीम द्वारा अस्थायी रिहाई के लिए आवेदन दायर किया गया है तो उस पर सक्षम प्राधिकारी द्वारा बिना किसी 'मनमानी या पक्षपात' के विचार किया जाना चाहिए।
हरियाणा सरकार पर लगाए गए थे आरोप
यह आरोप लगाया गया कि हरियाणा राम रहीम को अस्थायी रिहाई देते समय ‘हरियाणा अच्छे आचरण वाले कैदी (अस्थायी रिहाई) अधिनियम -2022’ की धारा 11 के तहत अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहा था। एसजीपीसी के वकील ने आरोप लगाया कि प्राधिकारियों ने सिंह को 2022 और 2024 के बीच अधिकतम अवधि के लिए बार-बार पैरोल या फरलो प्रदान किया। 'फरलो' किसी कैदी को एक विशिष्ट अवधि के लिए दी जाने वाली अस्थायी रिहाई है, जो सामान्यत: पारिवारिक संबंधों को बनाए रखने अथवा व्यक्तिगत मामलों को निपटाने के लिए दी जाती है।
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Published By : Dalchand Kumar
पब्लिश्ड 28 February 2025 at 16:54 IST