पॉक्सो केस में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को सुप्रीम कोर्ट से मिली बड़ी राहत, HC से मिली अग्रिम जमानत रहेगी बरकरार, नहीं जाएंगे जेल

सुप्रीम कोर्ट ने ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को बड़ी राहत दी है। कोर्ट ने नाबालिग बटुकों के कथित यौन शोषण और POCSO एक्ट के मामले में अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।

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Swami Avimukteshwaranand, Shankaracharya of Jyotirmath
Swami Avimukteshwaranand, Shankaracharya of Jyotirmath | Image: X

ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पॉक्सो केस में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के साथ-साथ उनके शिष्य मुकुंदानंद को राहत दी है। कोर्ट ने नाबालिग बटुकों के कथित यौन शोषण और POCSO एक्ट के मामले में अग्रिम जमानत रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।

 शिकायतकर्ता आशुतोष महाराज की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई थी, जिसमें कहा गया था कि हाई कोर्ट को गिरफ्तारी पर रोक नहीं लगानी चाहिए थी। मगर याचिकाकर्ता को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य की गिरफ्तारी से राहत दी है। 

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत

जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की बेंच ने शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी द्वारा दायर उस अपील को खारिज कर दिया, जिसमें सरस्वती को गिरफ्तारी से पहले जमानत देने के इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई थी।

आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की शिकायत पर हुई FIR

अविमुक्तेश्वरानंद पर पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज है। 21 फरवरी को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विनोद कुमार चौरसिया ने आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की याचिका पर ही स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद गिरी सहित अन्य के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने आरोपों को गंभीर बताते हुए POCSO एक्ट के साथ BNS की धारा 351(3) के तहत कार्रवाई का निर्देश दिया था। 

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अविमुक्तेश्वरानंद पर क्या है आरोप?

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद पर आरोप है कि माघ मेले के दौरान उनके विद्या मठ आश्रम या शिविर में दो नाबालिग बच्चों (14 और 17 वर्ष) के साथ यौन शोषण किया गया, जो 'गुरु सेवा' के बहाने हुआ। पीड़ितों के बयान कोर्ट में दर्ज किए गए और सबूत पेश किए गए। कोर्ट के आदेश के कुछ घंटों बाद ही 21 फरवरी को झूंसी पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज की गई और पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।

स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है। उन्होंने कहा कि आरोप "पूर्णतः निर्मित" हैं और शिकायतकर्ता आशुतोष ब्रह्मचारी एक हिस्ट्रीशीटर हैं। उन्होंने दावा किया कि आरोपित बच्चे कभी उनके गुरुकुल में नहीं आए, न पढ़े और उनके आश्रम से कोई संबंध नहीं है।

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Published By:
 Rupam Kumari
पब्लिश्ड