राहुल के 'फेवरेट', 50 विधायकों का समर्थन... फिर केरल CM की कुर्सी तक क्यों नहीं पहुंच पाए वेणुगोपाल? सतीशन के 'राजतिलक' की Inside Story
केरल के मुख्यमंत्री की दौड़ में केसी वेणुगोपाल सबसे आगे चल रहे थे, मगर आखिरी समय में पार्टी ने सतीशन के नाम का ऐलान कर सबको चौंका दिया। आईए जानते हैं केरल CM की कुर्सी तक क्यों नहीं पहुंच पाए वेणुगोपाल?
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कांग्रेस ने लंबे समय के माथापच्ची के बाद आखिरकार प्रदेश में सत्ता संभालने के लिए अपना नया चेहरा चुन लिया। विधायक दल की बैठक के बाद पार्टी ने गुरुवार को आधिकारिक घोषणा कर दी कि वीडी सतीशन केरल कांग्रेस विधायक दल के नेता और केरल के अगले मुख्यमंत्री होंगे। 4 मई को विधानसभा चुनाव नतीजों के ऐलान के बाद से केरल कांग्रेस में मुख्यमंत्री के नाम को लेकर 10 दिनों से मंथन जारी थी। अब पार्टी ने सतीशन के नाम का ऐलान कर सबको चौंका दिया, क्योंकि केसी वेणुगोपाल को करीब 50 विधायकों का समर्थन था और रेस में वो सबसे आगे चल रहे थे। ऐसे में केरल CM की कुर्सी तक क्यों नहीं पहुंच पाए वेणुगोपाल आईए समझते हैं?
केरल के मुख्यमंत्री की दौड़ में के.सी. वेणुगोपाल, वी.डी. सतीशन और रमेश चेन्निथला के बीच मुकाबला था। आखिर में पार्टी केरल कांग्रेस के प्रमुख चेहरे और अनुभवी नेता वडासेरी दामोदरन सतीशन (वी.डी. सतीशन) को केरल के नए मुख्यमंत्री पद के लिए चुना है। हालांकि वेणुगोपाल के पास संख्या बल ज्यादा था, वो राहुल के करीबी भी माने जाते हैं, लेकिन सतीशन ने कई मजबूत दलीलों और रणनीतिक समीकरणों के जरिए बाजी पलट दी।
केरल की जमीन से राजनीति की शुरुआत
कोच्चि के निकट नेटूर में 1964 में जन्मे सतीशन ने अपनी राजनीतिक यात्रा दिल्ली की सत्ता गलियारों से नहीं बल्कि केरल की जमीन से राजनीति से ही शुरू की। उन्होंने बीए के बाद LLB की डिग्री हासिल की और फिर वे छात्र राजनीति से जुड़ गए। पेशे से वकील और सामाजिक कार्यकर्ता सतीशन केरल छात्र संघ (KSU) के माध्यम से कांग्रेस राजनीति में शामिल हुए। यूथ कांग्रेस से शुरू हुआ उनका सफर आज उन्हें केरल के सीएम पद तक ले आया है।
जमीनी लोकप्रियता आई काम
वीडी सतीशन पार्टी कार्यकर्ताओं और जनता में काफी लोकप्रिय माने जाते हैं। पार्टी के आंतरिक सर्वे में भी उनकी स्वीकार्यता साफ नजर आई। आलाकमान के सामने मजबूत दलील दी गई कि वेणुगोपाल संगठन महासचिव रहते अपने समर्थकों को ज्यादा टिकट और आर्थिक मदद दिलवा सके थे, जिसकी वजह से वे ज्यादा संख्या में जीतकर आए। आम कार्यकर्ता और जनता का समर्थन सतीशन के पक्ष में था। उनकी जमीनी लोकप्रियता और विपक्ष के नेता के रूप में सक्रिय भूमिका को उनकी सफलता का प्रमुख कारण माना जा रहा है।
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विजयन सरकार के खिलाफ सबसे मुखर
सतीशन के राजनीतिक करियर में सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 2021 में आया, जब कांग्रेस ने उन्हें अप्रत्याशित रूप से विधानसभा में विपक्ष का नेता बना दिया। उस समय कई नेताओं को संदेह था क्योंकि उनके पास मंत्री पद का कोई अनुभव नहीं था। लेकिन पिछले पांच वर्षों में सतीशन ने खुद को पिनाराई विजयन सरकार के खिलाफ सबसे मुखर और प्रभावी आवाज साबित किया।
IUML का साथ से सतीशन को मिला फायदा
केरल में कांग्रेस की सरकार बनने के लिए इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) का समर्थन बेहद जरूरी है। IUML अंदरखाने वीडी सतीशन के साथ था। वेणुगोपाल के साथ IUML के संबंध उतने अच्छे नहीं माने जाते थे। IUML ने सतीशन को अपना समर्थन दिया, जिसने संख्यात्मक बहुमत से आगे बढ़कर सतीशन को मजबूत स्थिति दी।
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वायनाड सीट को लेकर फंसा था पेंच
वायनाड सीट गांधी परिवार के लिए महत्वपूर्ण है। IUML ने इस सीट को राहुल गांधी और बाद में प्रियंका गांधी के लिए खाली रखा था। IUML का इस क्षेत्र में अच्छा दबदबा है। IUML ने किसी स्थानीय विधायक (सतीशन) को मुख्यमंत्री बनाने का समर्थन किया, जिससे फैसला सतीशन के पक्ष में झुक गया।
इस वजह से वेणुगोपाल रह गए पीछे
चुनाव अभियान में भी सतीशन ने सक्रिय भूमिका निभाई। सतीशन के रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस के वरिष्ठ नेता के.सी. वेणुगोपाल थे, जो राहुल गांधी के सबसे करीबी सलाहकार माने जाते हैं और दिल्ली में उनका अच्छा प्रभाव है। कांग्रेस आलाकमान के सामने यह फैसला मुश्किल था कि जमीनी संघर्ष करने वाले नेता को प्राथमिकता दी जाए या दिल्ली के प्रभावशाली रणनीतिकार को। मगर सतीशन ने खुद को एक सॉलिड और स्वीकार्य चेहरा साबित किया जो गठबंधन को संभालने और पार्टी को एकजुट रखने में सक्षम है।
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