'परीक्षाएं रद्द हों तो छात्रों को आने-जाने, खाने और रहने का मिले खर्च', केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पेपर लीक को लेकर छात्रों के लिए की बड़ी मांग
पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि अगर किसी परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित किया जाता है तो छात्रों के आने-जाने, रहने और खाने-पीने का खर्च विभाग को वहन करना चाहिए।
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केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान इन दिनों युवाओं की समस्याओं को जोर-शोर से उठा रहे हैं। पटना में आयोजित यूथ संवाद कार्यक्रम में उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक को मेहनती युवाओं के साथ खिलवाड़ करार दिया था। आज पत्रकारों से बात करते हुए चिराग ने अपने बयान को दोहराते हुए छात्रों के लिए बड़ी मांग की। चिराग ने कहा कि अगर परीक्षाएं रद्द हों तो छात्रों को आने-जाने, खाने और रहने का खर्च मिलना चाहिए।
चिराग पासवान ने कहा, लोकसभा में पेपर लीक कानून को मजबूत करने की चर्चा के दौरान हमारी पार्टी के सांसद अरुण भारती ने छात्रों के इन अधिकारों को सदन में जोर-शोर से रखा था। आज भी हम छात्रों के साथ खड़े हैं। पेपर लीक जैसी समस्या मेहनती युवाओं के साथ खिलवाड़ है, ऐसे में शख्त कानून बनना जरूरी है।
पेपर लीक को लेकर चिराग पासवान ने कही बड़ी बात
पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने के मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने स्पष्ट किया कि अगर किसी परीक्षा को रद्द कर दोबारा आयोजित किया जाता है तो छात्रों के आने-जाने, रहने और खाने-पीने का खर्च विभाग को वहन करना चाहिए। यह केवल मांग तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसे छात्रों के अधिकार के रूप में कानूनी स्वरूप दिया जाना चाहिए।
चिराग का युवाओं के साथ संवाद
इससे पहले गुरुवार को पटना के वेटरनरी ग्राउंड में पार्टी के ‘यूथ बोले तो’ कार्यक्रम में चिराग पासवान ने बड़ी संख्या में उपस्थित युवाओं के साथ शिक्षा, रोजगार, प्रतियोगी परीक्षाओं, कौशल विकास, तकनीक और उद्यमिता जैसे विषयों पर खुला संवाद किया। उन्होंने कहा कि इस मंच का उद्देश्य युवाओं को अपनी समस्याएं, सुझाव और आकांक्षाएं सीधे रखने का अवसर देना है।
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वहीं, बेंगलुरु की एक स्टार्टअप कंपनी द्वारा बिहार और उत्तर प्रदेश के युवाओं को नौकरी न देने की कथित बात पर चिराग पासवान ने कहा कि भारत में ड्यूल सिटीजनशिप का कोई कॉन्सेप्ट नहीं है। हर भारतीय को देश के किसी भी हिस्से में रोजगार और व्यवसाय करने का अधिकार है। कंपनियों द्वारा इस तरह का भेदभाव उनके अपने बाजार के लिए भी नुकसानदायक हो सकता है।