'शांति-सब्र और लगन, देश के GenZ ने...', धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर क्या बोले सोनम वांगचुक? अस्पताल के बेड से दिया ऐसा रिएक्शन
धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे को एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने लोकतंत्र की जीत बताया है और कहा है ये सड़कों से सीधे लोकतंत्र की जीत है।
- भारत
- 3 min read

NEET पेपर लीक विवाद के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पद से इस्तीफा दे दिया है। प्रधानमंत्री मोदी ने उनका इस्तीफा स्वीकार कर लिया है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के ऐलान के साथ कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के खत्म होने के आसार नजर आ रहा है। इस बीच धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर अलग-अलग प्रतिक्रिया आनी भी शुरू हो गई। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने प्रतिक्रिया देते हुए इसे लोकतंत्र की जात बताया हैै।
देशभर में NEET-UG परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर जारी विवाद और जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन के बीच आखिरकर शिक्षा मंत्री ने अपना इस्तीफा दे दिया। धमेंद्र प्रधान के इस्तीफे को एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने लोकतंत्र की जीत बताया है और कहा है ये सड़कों से सीधे लोकतंत्र की जीत है। यह शांति, सब्र और लगन की जीत है।
सोनम वांगचुक ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर क्या कहा?
सोनम वांगचुक ने X पोस्ट में लिखा है, यह लोकतंत्र की जीत है, सीधा लोकतंत्र... जो सड़कों से निकला है। यह शांति, धैर्य और दृढ़ता की जीत है। CJP और देश की 'जेन जेड' (Gen Z) को बधाई; और उन सभी नागरिकों का धन्यवाद जिन्होंने डर और डर के डर को त्यागकर देश के हर कोने से आवाज उठाई। जवाबदेही से अब सुधार की ओर…l सोनम ने अस्पताल के बेड से विक्ट्री साइन भी दिखाया।
धर्मेंद्र प्रधान ने PM मोदी को लिखी चिट्ठी
धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया पर अपने इस्तीफा का ऐलान किया और वजह भी बताई। अपने चिट्ठी में उन्होंने लिखा कि पिछले चार दशक से अधिक समय से वह छात्र, शिक्षक और शिक्षा सुधार के लिए समर्पित रहे हैं। उनका हमेशा से मानना रहा है कि मजबूत, समावेशी और दूरदर्शी शिक्षा व्यवस्था ही किसी भी राष्ट्र के विकास की आधारशिला होती है। उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश सेवा का मौका मिलने के लिए आभार जताया।
Advertisement
इस्तीफे का क्यों लिया फैसला?
चिट्ठी में आगे लिखा है, पिछले 10 दिनों का घटनाक्रम देखकर मेरा मन दुःखी है। यह मेरे लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। भारत की युवाशक्ति ही, इस देश की असली ताकत है। देश की युवाशक्ति को भ्रम के कुचक्र में फंसने नहीं देंगे, यही मेरा संकल्प है। जंतर-मंतर पर और देश में जो स्थिति बनी है, इस स्थिति का राष्ट्र विरोधी ताकतें लाभ ना उठाएं, देश की एकता बनी रहे, भारत के एक भी विद्यार्थी का भविष्य कानूनी पेचीदगियों में ना उलझे, हमारे बच्चे अपना समय पढ़ाई में लगाएं, करियर बनाने पर फोकस करें, इसी बात पर विचार करते हुए मैंने अपना त्यागपत्र माननीय प्रधानमंत्री जी को भेज दिया है।