Sona Khodne wala Rat: एक चूहा ऐसा जो 6 महीने तक सोता रहता है, उठकर जहां खोदता है जमीन; वहीं मिलने लगता है सोना
Sona Khodne wala Rat: विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जब ये चूहे अपनी बिल बनाने के लिए मिट्टी खोदते हैं तो इसमें सोना भी निकलता है। इसलिए इन्हें 'सोना खोदने वाला चूहा' कहा जाता है। वे लोग जो इन्हें जानते हैं, वे हमेशा से इस इंतजार में रहते हैं कि ये कब मिट्टी खोदे कि उन्हें कुछ सोने मिल जाएं।
- भारत
- 3 min read

Sona Khodne wala Rat,Marmot Rat: भारत में आमतौर पर ऐसे चूहों की बात होती रहती है, जो लोगों को नुकसान पहुंचा देते हैं। इनके कारण घरों में कई सामानों को नुकसान की बात कही जाती है। किसी के कपड़े कुतर दिए तो किसी के खाने के सामान को नुकसान पहुंचा दिए। वहीं, किसी-किसी के घरों में तो ये चूहे बड़ी-बड़ी बिल तक बना देते हैं। खैर ये तो बात हुई आम घटनाओं की।
अब हम आपको एक ऐसे चूहों की कहानी बताने जा रहे हैं, जो अपनी बिल बनाने के लिए मिट्टी खोदते हैं तो उसमें सोना निकलता है। इन चूहों को लोग काफी शुभ भी मानते हैं। बड़ी और खास बात यह है कि ये चूहे भारत के कई क्षेत्रों में पाए जाते हैं, लेकिन इन्हें देखना सभी की बस की बात नहीं क्योंकि ये साल में तो 6 से 8 महीने तक अपनी सुरंग में सोते रहते हैं। आइए अब इनके बारे में जानते हैं…
सोना खोजने वाला चूहा - मरमोट चूहा
'सोना खोदने वाला चूहा', भारत के हिमालय क्षेत्र में पाए जाते हैं। इसके अलावा ये लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, लाहौल-स्पीति, सिक्किम में भी पाए जाते हैं। उधर तिब्बत में भी ये पाए जाते हैं। यहां के लोग इन्हें शुभ मानते हैं। इन चूहों को मरमोट कहा जाता है। वैसे इनकी साइज किसी खरगोश और गिलहरी जैसी होती है, बाकी देखने में ये बड़े चूहे लगते हैं। इनकी लंबाई 50 से 70 सेमी होती है और इनका वजन 4 से 9 किलो तक। हालांकि, इसमें ऊपर-नीचे भी हो सकता है।
विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जब ये चूहे अपनी बिल बनाने के लिए मिट्टी खोदते हैं तो इसमें सोना भी निकलता है। इसलिए इन्हें 'सोना खोदने वाला चूहा' कहा जाता है। वे लोग जो इन्हें जानते हैं, वे हमेशा से इस इंतजार में रहते हैं कि ये कब मिट्टी खोदे कि उन्हें कुछ सोने मिल जाएं।
Advertisement
6 से 8 महीने तक सोते रहते हैं ये चूहे
विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, हिमालय क्षेत्र में जैसे-जैसे ठंड बढ़ती जाती है, वैसे-वैसे ये बिल बनाते हुए जमीन के अंदर जाते रहते हैं। काफी बर्फ और सर्दी हो जाने के कारण ये चूहे अपनी लंबी सुरंग में जमीन के काफी अंदर चले जाते हैं और 6 से 8 महीने तक सोते रहते हैं। इनकी गिनती दुनिया में सबसे लंबी नींद लेने वाले जंतुओं में भी की जाती है। मिली जानकारी के अनुसार, आमतौर पर ये चूहे अक्टूबर में सोने चले जाते हैं और अप्रैल-मई तक सोते रहते हैं। उसके बाद गर्मी के दिनों में बाहर आते हैं और अपना काम करते हैं। ये चूहे घास समेत अन्य चीजें खाते हैं। बताया जाता है कि लद्दाख में अकसर इनकों सेना की चौकियों के पास भी देखा जाता है।