Somnath Temple Kumbhabhishek: सोमनाथ मंदिर के शिखर पर पहली बार ऐतिहासिक कुंभाभिषेक, क्यों खास है ये अनुष्ठान? जानिए महत्व और प्रक्रिया

Somnath Temple Kumbhabhishek: सोमनाथ मंदिर पर पहली बार कुंभाभिषेक हुआ। पीएम मोदी ने रिमोट के जरिए मंदिर के शिखर का कुंभाभिषेक किया। जानिए क्या होता है कुंभाभिषेक

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Somnath Temple Kumbhabhishek
सोमनाथ मंदिर का कुंभाभिषेक | Image: X

PM Modi at Somnath Temple: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज (11 मई) गुजरात के दौरे पर हैं। सोमनाथ मंदिर के 75 साल पूरे होने पर आयोजित भव्य कार्यक्रम 'सोमनाथ अमृत महोत्सव' में वे शामिल हुए। इससे पहले उन्होंने 2 किमी लंबा रोड शो खत्म भी किया।  पीएम मोदी ने मंदिर में पूजा-अर्चना की। इस दौरान सोमनाथ मंदिर के भव्य शिखर का कुंभाभिषेक भी हुआ।

11 तीर्थों के पवित्र जल से कुंभाभिषेक

पहली बार सोमनाथ मंदिर का कुंभाभिषेक किया गया। इसके लिए देश के 11 प्रमुख तीर्थों (जैसे गंगा, यमुना, नर्मदा, गोदावरी आदि) से पवित्र जल लाया गया। लगभग 8 फीट ऊंचा और 1.86 टन वजन वाला विशाल कलश तैयार किया गया। इस भारी कुंभ को 90 मीटर ऊंचे क्रेन की मदद से मंदिर के शिखर तक ऊपर उठाया गया। शिखर पर पहुंचने के बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पुजारियों ने इस पवित्र जल से शिखर का अभिषेक किया।

क्या होता है कुंभाभिषेक?

कुंभाभिषेक दो शब्दों से बना है- 'कुंभ' यानी कलश या घड़ा, और 'अभिषेक' यानी पवित्र जल से स्नान कराना। यह हिंदू मंदिरों में किया जाने वाला सबसे पवित्र और दुर्लभ अनुष्ठानों में से एक है।

कब किया जाता है कुंभाभिषेक?

कुंभाभिषेक मंदिर को नई ऊर्जा और पवित्रता प्रदान करने के लिए किया जाता है। यह मुख्य रूप से निम्नलिखित अवसरों पर किया जाता है:

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  • नए मंदिर के निर्माण के बाद प्राण-प्रतिष्ठा के समय।
  • 12 वर्ष में एक बार (कुछ परंपराओं में 10 या 15 वर्ष बाद) पुराने मंदिर का नवीनीकरण करने के लिए।
  • मंदिर की बड़ी मरम्मत, जीर्णोद्धार या विस्तार के बाद।
  • किसी विशेष शुभ मुहूर्त या त्योहार के अवसर पर, जैसे सोमनाथ मंदिर में हाल ही में 75 वर्ष पूरे होने पर किया गया।

कुंभाभिषेक का महत्व

किसी भी तीर्थस्थल या मंदिर की पवित्रता और आध्यात्मिक ऊर्जा को फिर से जागृत करने के लिए कुंभाभिषेक किया जाता है।  पवित्र नदियों के जल से मंदिर के शिखर, गोपुरम और मुख्य विग्रह का अभिषेक करने से मंदिर में नई दिव्य ऊर्जा का संचार होता है। यह अनुष्ठान मंदिर की शुद्धि, नकारात्मक शक्तियों का निवारण और सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करने का प्रतीक माना जाता है।

मान्यता है कि कुंभाभिषेक के बाद मंदिर की दिव्यता कई गुना बढ़ जाती है, जिससे भक्तों को अधिक शांति, आशीर्वाद और मनोकामना पूर्ति का लाभ मिलता है।

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Published By:
 Ruchi Mehra
पब्लिश्ड