Sikkim Tunnel Collapse: सिक्किम में सुरंग ढहने से अबतक 20 मजदूरों की मौत, 5 से ज्यादा फंसे; जहरीली गैस के बीच बचाव अभियान जारी
नामची के पुलिस अधीक्षक (SP) सोनम डी भूटिया के मुताबिक, 20 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। अब तक 12 शव निकाले जा चुके हैं, जिनमें से 7 की पहचान हो गई है और अन्य शवों की पहचान के प्रयास जारी हैं।
- भारत
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Sikkim Tunnel Collapse: सिक्किम के नामची जिले में सोमवार को हुए भारी भूस्खलन के कारण एक निर्माणाधीन सुरंग का प्रवेश द्वार बंद हो गया, जिससे लगभग 27 मजदूर अंदर फंस गए। घटना के दूसरे दिन भी राहत और बचाव अभियान युद्ध स्तर पर जारी है। बेहद चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद सुरंग में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
नामची के पुलिस अधीक्षक (SP) सोनम डी भूटिया के मुताबिक, 20 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। अब तक 12 शव निकाले जा चुके हैं, जिनमें से 7 की पहचान हो गई है और अन्य शवों की पहचान के प्रयास जारी हैं। वहीं पांच श्रमिक अभी भी लापता हैं जिन्हें ढूंढने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं। फिलहाल बचाव अभियान सुरंग के 200 मीटर के हिस्से में चलाया जा रहा है, जहां मजदूरों के फंसे होने की आशंका है। अधिकारियों के अनुसार, सुरंग के अंदर लगभग 1.5 किलोमीटर की दूरी पर मीथेन गैस बड़ी मात्रा में जमा हो गई थी।
कैसे हुआ भूस्लखन?
माना जा रहा है कि यह गैस भूमिगत चट्टानों और प्राकृतिक परतों से निकलकर सुरंग में जमा हो गई थी। इस इकट्ठी गैस को बाहर निकालने की कोशिश के दौरान अचानक जोरदार विस्फोट हुआ। विस्फोट के बाद भूस्खलन हुआ और सुरंग का एक बड़ा हिस्सा मलबे की चपेट में आकर पूरी तरह बंद हो गया। हादसे के तुरंत बाद कुछ मजदूर सूझबूझ से अपनी जान बचाकर बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि कई अन्य मजदूर अब भी सुरंग के भीतर ही फंसे हुए हैं।
चुनौतियों के बीच बचाव अभियान जारी
बचाव कार्य के दौरान सबसे बड़ी चुनौती सुरंग के भीतर जमा मीथेन गैस और ऑक्सीजन की कमी निकलकर सामने आ रही है। इसके अलावा एक और चीज जो राहत कार्य में बड़ी बाधा बन रही है वो टनल का संकरा रास्ता और कम दृश्यता है। ऐसे में बड़ी ही सावधानी से बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
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पीएम मोदी ने जताया दुख
वहीं मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामची जिले में निर्माणाधीन सुरंग के ढहने से हुई मौतों पर दुख व्यक्त किया है। साथ ही प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष (PMNRF) से हर मृतक के परिवार को 2 लाख रुपये की मदद देने का ऐलान किया। प्रधानमंत्री ने इस घटना में घायल हुए लोगों के लिए भी 50,000 रुपये देने की घोषणा की।
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने एक्स पर एक पोस्ट में लिखा, 'नामची, सिक्किम में बन रही एक टनल के ढहने से हुई मौतों से दुखी हूं। मैं पीड़ित परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। मैं प्रार्थना करता हूं कि घायल लोग जल्द से जल्द ठीक हो जाएं। PMNRF से हर मृतक के परिवार को 2 लाख रुपये की मदद दी जाएगी। घायलों को 50,000 रुपये दिए जाएंगे।'
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NHPC प्रोजेक्ट के लिए बन रही थी सुरंग
बता दें कि यह सुरंग NHPC की तीस्ता स्टेज-VI हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्रोजेक्ट के तहत बनाई जा रही थी, जिसके निर्माण कार्य की जिम्मेदारी पटेल इंजीनियरिंग कंपनी के पास थी। गौरतलब है कि सिक्किम का पहाड़ी इलाका हमेशा से ही भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से बेहद संवेदनशील रहा है। यहां होने वाली लगातार बारिश और पहाड़ी इलाकों में अचानक जमीन खिसकने की घटनाएं बचाव कार्यों में अक्सर बड़ी चुनौती खड़ी करती है।
फिलहाल स्थानीय प्रशासन और बचाव एजेंसियां सुरंग के अंदर फंसे सभी मजदूरों तक पहुंचने और उन्हें बाहर निकालने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास कर रही हैं।