पुणे में श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति का पारंपरिक स्वागत, गोविंद देव गिरी महाराज ने DJ-मुक्त गणेशोत्सव की अपील की

मंडल के कार्यक्रम में गोविंद देव गिरी महाराज ने DJ-मुक्त गणेशोत्सव की अपील की। इस दौरान उन्होंने कहा कि गणेशोत्सव भारतीय संस्कृति से गहराई से जुड़ा पर्व है। ऐसे में उत्सवों में भारतीय वाद्ययंत्रों की आवाज और पारंपरिक संगीत को बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

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Traditional welcome of Shrimant Bhausaheb Rangari Ganpati in Pune
पुणे में श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति का पारंपरिक स्वागत | Image: Republic

पुणे में सोमवार को गणेशोत्सव की शुरुआत एक खास पारंपरिक अंदाज में हुई। श्रीमंत भाऊसाहेब रंगारी गणपति के आगमन पर शहर के प्रमुख रास्तों पर श्रद्धालुओं की भीड़ नजर आई। ढोल-ताशा और नगाड़ों की आवाज के साथ निकली शोभायात्रा में गुलाल और ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयघोष ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। इसी अवसर पर स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने DJ-मुक्त गणेशोत्सव की अपील करते हुए भारतीय परंपरा और संगीत को महत्व देने की बात कही।

मंडल के कार्यक्रम में गोविंद देव गिरी महाराज ने कहा कि गणेशोत्सव भारतीय संस्कृति से गहराई से जुड़ा पर्व है। ऐसे में उत्सवों में भारतीय वाद्ययंत्रों की आवाज और पारंपरिक संगीत को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि विदेशी संस्कृति की नकल करने के बजाय अपनी परंपरा को आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ाना चाहिए। DJ संगीत के साथ होने वाले उन्मादी नृत्य को उन्होंने भारतीय परंपरा के अनुरूप नहीं माना।

गोविंद देव गिरी महाराज ने पुणे की विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह शहर लंबे समय से देश को प्रेरणा देता आया है। उन्होंने पुणे को शौर्य, उद्यम और नेतृत्व से जुड़ा शहर बताया। उन्होंने अपने जीवन में संत ज्ञानेश्वर महाराज और छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रेरणा का भी उल्लेख किया।

बप्पा के आगमन से पहले रंगारी भवन में पुनीत बालन और जान्हवी धारीवाल-बालन ने पूजा और आरती की। इसके बाद आधव बंधुओं का पारंपरिक नगाड़ा वादन हुआ। फूलों और केले के पत्तों से सजाए गए रथ पर गणपति की प्रतिमा को विराजमान किया गया और शोभायात्रा रवाना हुई।
शहर के रास्तों पर अलग-अलग ढोल-ताशा पथकों ने अपनी कला का प्रदर्शन किया। यात्रा छत्रपति शिवाजी महाराज रोड से बुधवार चौक, अप्पा बळवंत चौक और बाजीराव रोड की ओर बढ़ी। श्रीराम पाठक, नादब्रह्म, ज्ञान प्रबोधिनी, आवर्तन, वाद्यवृंद, समर्थ और शंखनाद सहित कई पथकों ने पारंपरिक वादन किया।

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बुधवार चौक पर कसबा पुणे दहीहंडी एसोसिएशन के गोविंदाओं ने सात-स्तरीय मानव पिरामिड बनाकर बप्पा का स्वागत किया। शोभायात्रा के दौरान सात रंगों की छटा और गुलाल की बौछार ने उत्सव को और आकर्षक बना दिया। करीब 12.30 बजे बप्पा श्री गणेश सुवर्णधाम मंदिर पहुंचे। यहां प्रतिमा को सजाए गए मखर में स्थापित किया गया। पद्म विभूषण पंडित हरिप्रसाद चौरसिया ने प्राण प्रतिष्ठा संपन्न की। उन्होंने कहा कि भारत के पहले सार्वजनिक गणपति की प्राण प्रतिष्ठा करना उनके लिए सम्मान और सौभाग्य का अवसर है। उन्होंने सभी के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

प्राण प्रतिष्ठा के बाद श्रद्धालुओं ने बप्पा के दर्शन और आरती की। गोविंद देव गिरी महाराज और सुप्रिया सुले समेत कई गणमान्य लोग भी मंदिर पहुंचे। गोविंद देव गिरी ने युवाओं से माता-पिता को कभी दुखी न करने की अपील की। पुनीत बालन ने कहा कि इस वर्ष भी बप्पा का आगमन पूरे उत्साह के साथ हुआ है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में अच्छी बारिश, लोगों के स्वास्थ्य, शांति और समृद्धि के लिए बप्पा से प्रार्थना की गई है। ट्रस्ट की ओर से दस दिवसीय उत्सव में धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

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Published By:
 Priyanka Yadav
पब्लिश्ड