जज्बे को सलाम... मोबाइल की बैटरी खत्म, सिर्फ आधा लीटर पानी, जब ट्रैकिंग के दौरान हाथियों वाले जंगल में भटक गई शरण्या, 96 घंटे की खौफनाक कहानी

कर्नाटक के जंगल में एक युवती 4 दिनों तक लापता रही। इस दौरान शरण्या नाम की युवती के पास सिर्फ आधा लीटर पानी ही था। पढ़ें उन्होंने कैसे जंगल में 96 घंटे बिताएं, रात को जनवरों की आवाज सुनकर वह डर जाती थीं... जब बेटी को 4 दिन बाद ढूंढा गया तो पिता बेटी को गले लगाकर रो पड़े। देखें वीडियो।

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Kerala Trekkers Missing Sharanya
शरण्या ने बताया घने जंगल में कैसे जिंदा रहीं? | Image: X

Kerala Trekkers Missing: कर्नाटक में मदिकेरी के जंगल में ट्रेकिंग के दौरान एक महिला लापता हो गई। महिला अपने साथियों से बिछड़ गई थीं, जिसके बाद रविवार को उन्हें सुरक्षित ढूंढ निकाला लिया गया। जब महिला अपने पिता से मिली तो इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पिता अपनी बेटी को सीने से लगाए रो रहा है। यह दिल को छू लेने वाले पल का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। कोडागु के घने जंगलों में 4 दिन लापता रहने के बाद आखिर शरण्या अपने परिवार से मिली।

शरण्या नाम की यह युवती टेकी तडियांडामोल पीक पर ट्रेकिंग के दौरान अपने ग्रुप से बिछड़ गई थीं। जिसके बाद उन्हें सुरक्षित ढूंढ निकाला गया। गनीमत रही कि उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं आई है, लेकिन वह काफी थकी हुई हैं। शरण्या ने अपनी पूरी कहानी बताई। उन्होंने कहा कि, 'मुझे उम्मीद नहीं थी कि इतनी जल्दी तलाश शुरू हो जाएगी।'

ट्रेकिंग के दौरान रास्ता कैसे भटकी शरण्य? 

शरण्या पास के गांव में होमस्टे में रुकी हुई थीं। गुरुवार सुबह 8 बजे वे चेकपोस्ट पहुंचीं और करीब 12 लोगों के ग्रुप के साथ ट्रेकिंग शुरू की। सुबह 10:40 बजे चोटी पर पहुंचकर वे नीचे उतरने लगीं। बीच में तेज चलते हुए वे ग्रुप से आगे निकल गईं। पीछे मुड़कर देखा तो कोई दिखाई नहीं दिया। वे वापस लौटने की कोशिश करती रहीं, लेकिन घने जंगल में पहुंच गईं। दोपहर करीब 2:45 बजे उनका मोबाइल बंद हो गया। उससे पहले उन्होंने होमस्टे मालिक को फोन करके बताया था कि रास्ता भटक गई हैं। उसके बाद उनका सभी से संपर्क टूट गया।

96 घंटे तक जिंदगी और मौत की जंग लड़ती रही…

शरण्या के पास शुरू में सिर्फ आधा लीटर पानी था। उन्होंने बताया, “मैंने खाना नहीं रखा था क्योंकि ट्रेक आसान था। जब वो लापता हो गई तो उनके साइड में एक नदी थी, शरण्या उस नदी के किनारे ही चलती रही और नदी का पानी पीकर गुजारा करती रही। उन्होंने 4 दिनों तक दिन में तीन बार पानी पिया। उन्होंने एक बड़ी चट्टान और संकरी धारा के पास सुरक्षित जगह ढूंढ ली थी जहां जानवर आसानी से नहीं पहुंच सकते थे। रात में जंगल की आवाजें सुनकर उन्हें घबराहट होती थी, लेकिन उन्होंने खुद को संभाल लिया।

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जंगल में गुजारीं चार रातें, फिर रेस्क्यू और भावुक पल

रविवार को स्थानीय लोगों ने उन्हें सुनसान जगह पर पाया। रेस्क्यू टीम पहुंचते ही शरण्या पूरी तरह सुरक्षित मिलीं। उनके पिता ने बेटी को गले लगाया और भावुक हो गए। यह पल देखकर हर कोई रो पड़ा। शरण्या ने कहा कि, 'मुझे ज्यादा डर नहीं लगा। बस उम्मीद थी कि जल्दी मदद मिल जाएगी।' यह घटना जंगल की खतरों और साहस की मिसाल बन गई है। कर्नाटक के मदिकेरी प्रशासन ने रेस्क्यू टीम और स्थानीय आदिवासियों की सराहना की। शरण्या अब सुरक्षित घर पहुंच चुकी हैं, लेकिन उनकी 96 घंटे की यह कहानी लंबे समय तक लोगों को याद रहेगी।

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Published By:
 Nidhi Mudgill
पब्लिश्ड