LG वीके सक्सेना मानहानि मामले में मेधा पाटकर को झटका, सेशन कोर्ट ने ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के आदेश में दखल से किया इंकार
साकेत कोर्ट की सेशन कोर्ट ने मेधा पाटकर को आपराधिक मानहानि के मामले में दोषी ठहराने के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के आदेश में दखल देने से इनकार कर दिया।
- भारत
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अखिलेश राय
दिल्ली के उपराज्यपाल वीके सक्सेना की ओर से सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर के खिलाफ दाखिल मानहानि का मामले में साकेत कोर्ट की सेशन कोर्ट ने सामाजिक कार्यकर्ता मेधा पाटकर को आपराधिक मानहानि के मामले में दोषी ठहराने के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इंकार कर दिया है।
साकेत कोर्ट ने मेधा पाटकर को 8 अप्रैल को सजा के आदेश के लिए पेश होने का आदेश दिया। मेधा पाटकर ने साकेत कोर्ट के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट के आदेश को सेशन कोर्ट में चुनौती दी थी। साकेत कोर्ट ने मेधा पाटकर को आईपीसी की धारा 500 के तहत दोषी करार दिया था।
'मेधा पाटकर को 5 महीने की कैद, 10 लाख जुर्माना'
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साकेत कोर्ट के ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट ने मेधा पाटकर को पांच महीने की कैद और दस लाख रुपए के जुर्माने की सजा दी थी। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि ये साफ हो गया है कि आरोपी मेधा पाटकर ने सिर्फ प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के लिए वीके सक्सेना के खिलाफ गलत जानकारी के साथ आरोप लगाए।
मेधा पाटकर ने वीके सक्सेना पर लगाए थे हवाला से लेनदेन के आरोप
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दरअसल 25 नवंबर 2000 को मेधा पाटकर ने अंग्रेजी में एक बयान जारी कर वीके सक्सेना पर हवाला के जरिए लेनदेन का आरोप लगाया था और उन्हें कायर कहा था। पाटकर ने कहा था वीके सक्सेना गुजरात के लोगों और उनके संसाधनों को विदेशी हितों के लिए गिरवी रख रहे थे। ऐसा बयान सक्सेना की ईमानदारी पर सीधा-सीधा हमला था।