Jantar Mantar Protest: सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, जंतर-मंतर प्रोटेस्ट की जांच के लिए हाई पावर्ड कमेटी का होगा गठन
Jantar Mantar: सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के जंतर-मंतर में छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और इससे जुड़े अन्य मुद्दों की जांच के लिए एक हाई-पावर्ड कमेटी बनाने को कहा है।
- भारत
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Jantar Mantar Protest Delhi: सोमवार, 18 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सुनवाई के दौरान एक बड़ा ऐलान किया। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा है कि वह छात्र प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ पुलिस की ज्यादतियों के आरोपों और इससे जुड़े अन्य मुद्दों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड कमेटी बनाएगा। इस कमेटी में रिटायर्ड डायरेक्टर जनरल सदस्य के तौर पर भी शामिल होंगे।
वहीं, दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए उसके जवानों ने "कम से कम जरूरी बल" का इस्तेमाल किया और "बहुत ज़्यादा संयम" बरता।
हाई-पावर्ड कमेटी का होगा गठन; SC
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा है कि वह छात्र प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई और इससे जुड़े अन्य मुद्दों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के एक पूर्व जज की अध्यक्षता में एक हाई-पावर्ड कमेटी का गठन होगा। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि इस कमेटी में हाई कोर्ट के एक पूर्व जज और एक रिटायर्ड डायरेक्टर जनरल सदस्य के तौर पर शामिल होंगे।
"कम से कम जरूरी बल" का इस्तेमाल किया-दिल्ली पुलिस
दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि जंतर-मंतर पर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रदर्शनकारियों को काबू में करने के लिए उसके जवानों ने "कम से कम ज़रूरी बल" का इस्तेमाल किया और "बहुत ज़्यादा संयम" बरता।
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हलफ़नामे में कहा गया है कि हालात तब बिगड़े जब प्रदर्शनकारी हिंसक हो गए और संसद की ओर मार्च करने की कोशिश में बैरिकेड्स की कई परतें तोड़ दीं। यह हलफ़नामा उन याचिकाओं के सिलसिले में दायर किया गया था जिनमें आरोप लगाया गया था कि प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ने ज़रूरत से ज़्यादा बल का इस्तेमाल किया।
SC में दाखिल हलफनामे में दिल्ली पुलिस ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में, डिप्टी कमिश्नर ऑफ़ पुलिस (नई दिल्ली ज़िला) सचिन शर्मा ने कील लगी लाठियों के इस्तेमाल के आरोपों का जवाब दिया और इस दावे को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जिस फुटेज के आधार पर यह दावा किया गया, वह "सिर्फ़ एक अकेला वीडियो" था।'
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पुलिस ने कहा कि वीडियो में जो चीज़ दिख रही थी, वह असल में राष्ट्रीय झंडे वाली एक लाठी थी और "शायद किसी प्रदर्शनकारी ने उसे पकड़ा हुआ था।" पुलिस ने यह भी कहा कि इस बात का कोई मेडिकल सबूत नहीं है कि प्रदर्शनकारियों को लाठियों में लगी कीलों से चोटें आईं।