अपडेटेड 25 February 2026 at 14:04 IST
'किसी समुदाय की छवि खराब नहीं होगी', फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' का टाइटल बदलने की मांग SC में खारिज, कोर्ट ने कहा-'घूसखोर पंडित' से अलग मामला
सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' का टाइटल बदलने की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी है। अर्जी में कहा गया था कि नाम से एक गलत छवि बनती है, मगर कोर्ट ने कहा कि जताई गई आशंकाएं बेबुनियाद थीं।
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फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' के निर्माता-निर्देशक को बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें फिल्म के टाइटल को लेकर आपत्ति जताई गई थी। मनोज बाजपेयी की 'घूसखोर पंडित' के बाद 'यादव जी की लव स्टोरी' को लेकर भी विवाद शुरू हो गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट में टाइटल बदलने की मांग को लेकर अर्जी दाखिल की थी। बुधवार को मामले की सुनवाई करते हुए SC ने याचिका खारिज कर दी। आईए जानते हैं कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने आने वाली फिल्म “यादव जी की लव स्टोरी” का टाइटल बदलने की मांग वाली अर्जी खारिज कर दी है। अर्जी में कहा गया था कि नाम से एक गलत छवि बनती है और यादव समुदाय को गलत तरीके से दिखाया गया है। पिटीशनर ने कहा था कि फिल्म का टाइटल समुदाय की सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है और मौजूदा नाम से इसकी रिलीज पर रोक लगाने के लिए निर्देश मांगे थे। चुनौती को खारिज करते हुए, कोर्ट ने कहा कि जताई गई आशंकाएं बेबुनियाद थीं।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों कि याचिका खारिज?
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि बीवी नागरत्ना की अगुवाई वाली बेंच ने देखा कि फिल्म के टाइटल में यादव समुदाय के खिलाफ कोई भी एडजेक्टिव या एक्सप्रेशन नहीं था। कोर्ट ने घूसखोर पंडित में अपने पहले के फैसले से अलग यह कहते हुए कहा कि “घूसखोर” (मतलब भ्रष्ट) शब्द एक समुदाय के लिए एक साफ नेगेटिव बात जोड़ता है, जो यहां नहीं था। कोर्ट ने माना कि संविधान के आर्टिकल 19(2) के तहत कोई भी सही रोक नहीं लगती, क्योंकि टाइटल में समुदाय को किसी भी तरह से गलत तरीके से नहीं दिखाया गया था, और इसलिए रिट पिटीशन खारिज कर दी।
'घूसखोर पंडित' विवाद का दिया था तर्क
बता दें कि यादव समुदाय के एक प्रतिनिधि द्वारा दाखिल याचिका में दावा किया गया था कि फिल्म का टाइटल उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा सकता है और समुदाय को गलत तरीके से चित्रित करता है। याचिकाकर्ता ने फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने या उसके नाम में बदलाव की मांग की थी। उन्होंने इसे पहले के 'घूसखोर पंडित' विवाद से जोड़ते हुए तर्क दिया था। सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए इसे खारिज कर दिया।
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Published By : Rupam Kumari
पब्लिश्ड 25 February 2026 at 14:04 IST