अपडेटेड 16 February 2026 at 14:46 IST
CM हिमंता के 'मियां' वाले बयान पर सुप्रीम कोर्ट का सुनवाई से इनकार, याचिकाकर्ता को कहा- आप HC क्यों नहीं जाते; क्या है पूरा मामला?
सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ 'मियां मुस्लिमों' वाले बयान और सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई कथित हेट स्पीच को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है।
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SC Refuses SIT Probe against Assam CM: असम मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा के 'मियां मुस्लिमों' के खिलाफ कथित 'हेट स्पीच' को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है।
दरअसल, सीएम हिमंता बिस्वा सरमा के खिलाफ 'मियां मुस्लिमों' वाले बयान और सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई कथित हेट स्पीच को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई थी। इसे लेकर स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) जांच और FIR दर्ज कर कार्रवाई की मांग की गई थी। याचिका में सीएम के बयानों को नफरत फैलाने वाला और दो समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने वाला बताया गया।
SC ने हाईकोर्ट का रुख करने को कहा
इसी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने गुवाहाटी हाई कोर्ट से याचिकाकर्ताओं की जल्द सुनवाई करने को कहा है। कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि वह हाई कोर्ट की शक्तियों को कम न आंकें। अगर याचिकाकर्ता हाई कोर्ट की दी गई राहत से संतुष्ट नहीं होते, तब वह सुप्रीम कोर्ट का रुख कर सकते हैं।
हाईकोर्ट में जल्द होगी सुनवाई!
कोर्ट ने कहा कि अधिकारियों के खिलाफ कई निर्देश मांगे गए हैं। इन सभी मामलों पर हाई कोर्ट को फैसला सुनाना चाहिए। संबंधित अधिकारियों ने कोर्ट से कहा कि इस मामले पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से इस मुद्दे पर जल्द सुनवाई करने का आग्रह किया।
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क्या है पूरा मामला?
दरअसल, सीएम हिमंता ने कहा था कि 'अगर मैं असम में रहा, तो उन्हें (मियां समुदाय के लोगों को) परेशानी का सामना करना पड़ेगा। वह यहां शांति से नहीं रह सकते। अगर हम उनके लिए मुश्किलें खड़ी करेंगे, तभी वह राज्य छोड़ेंगे।' उन्होंने तर्क दिया था कि मियां अवैध बांग्लादेशी हैं, इसलिए उन्हें राज्य में काम करने की इजाजत नहीं दी जानी चाहिए।
जमीयत ने दायर याचिका में क्या कहा था?
जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने याचिका में सरमा के उस बयान का जिक्र किया था जिसमें उन्होंने कहा था कि असम में SIR प्रक्रिया के दौरान 4 से 5 लाख मियां वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा था कि उनका काम मियां लोगों को परेशान करना है।
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जमीयत ने याचिका में मियां शब्द के इस्तेमाल पर जोर दिया था। दलील दी गई थी कि असम में मियां शब्द बंगाल के मुस्लिमों के लिए अपमानजनक और नकारात्मक तरीके से इस्तेमाल किया जाता है। जमीयत ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की थी कि सीएम हिमंता के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए जाएं जिससे की भविष्य में कोई संवैधानिक पद पर काबिज अधिकारी ऐसे बयान न दे सके। यह भी कहा गया कि ऐसे बयान सामाजिक सद्भाव को नुकसान पहुंचाने के साख ही संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन करते हैं।
Published By : Priyanka Yadav
पब्लिश्ड 16 February 2026 at 14:45 IST