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Updated April 3rd, 2024 at 08:18 IST

लाल सागर में टेंशन पर बोले एस जयशंकर- पड़ोस में ऐसी स्थितियों को देखना भारत की जिम्मेदारी

लाल सांगर में बढ़ी टेंशन को लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि पड़ोस में जो हो रहा उसे देखना भारत की जिम्मेदारी है, क्योंकि शिप पर सबसे ज्यादा हमारे लोग हैं।

Reported by: Kanak Kumari
S Jaishankar
एस जयशंकर | Image:PTI
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लाल सागर में चल रहे तनाव को लेकर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हमारे आसपास जो भी हो रहा है, उसे देखना के भारत की जिम्मेदारी है। बता दें, लाल सागर में आए दिन शिप हाइजैक या मिसाइल अटैक की खबरें सामने सा रही है। हालांकि, इंडियन नेवी एक्टिव है और ताबड़तोड़ एक्शन भी ले रही है। इसे लेकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हमारे लाल सागर में इस वक्त दो चीजें हो रही हैं, जिसमें ड्रोन और मिसाइलों के जरिए जहाजों पर हमले के साथ-साथ सोमालिया के समुद्री लुटेरों का जहाज पर कब्जा करना भी शामिल है।

अहमदाबाद में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस एस जयशंकर ने कहा कि यह भारत की जिम्मेदारी है कि वह पड़ोस में ऐसी स्थितियों को देखे और अन्य देशों के साथ मिलकर उनसे कैसे निपटे। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर ने इजरायल और हमास के बीच चल रहे युद्ध का भी जिक्र किया और बताया कि समुद्री रास्तों पर इसका क्या असर हो रहा है। उन्होंने कहा, "यह सिर्फ गुजरात की समस्या नहीं है, बल्कि भारत या मेरी भी समस्या है। पूरी दुनिया का कहना है। इजरायल और गाजा के बीच शुरू हुए युद्ध का असर अन्य जगहों पर भी हो रहा है। लाल सागर में दो चीजें हो रही हैं- एक, कुछ शक्तियां ड्रोन और मिसाइलों के जरिए शिपिंग पर हमला कर रही हैं। दूसरा, सोमालिया में समुद्री डाकू हमला कर रहे हैं। जहाजों पर इसलिए हमले हो रहे हैं, क्योंकि वे सोचते हैं कि यह उनके लिए एक अवसर है क्योंकि दुनिया की नजर ड्रोन और मिसाइलों पर है।"

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समुद्री मार्ग में हमलों का असर व्यापार पर: एस जयशंकर

उन्होंने कहा कि मर्चेंट नेवी में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक हैं। किसी जहाज पर हमले की स्थिति में क्रू मेंबर के अधिकांश सदस्य भारतीय नागरिक होते हैं और भारत उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, "हमारे लिए, दो चिंताएं हैं- पहला, हमारा व्यापार लाल सागर के माध्यम से होता है, स्वेज नहर के माध्यम से पश्चिमी अरब सागर के माध्यम से होता है। इसलिए, यह चिंता का विषय है क्योंकि बीमा दरें बढ़ जाती हैं और फिर स्वेज नहर के बजाए बहुत सारी शिपिंग अफ्रीका से होने लगती है, जिससे शिपिंग लागत बढ़ जाती है।"

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ज्यादातर लोग हमारे हैं इसलिए यह चिंता का विषय है: एस जयशंकर

उन्होंने आगे कहा कि दूसरा, मर्चेंट शिपिंग में हमारे नागरिक बड़ी संख्या में हैं, हम फिलीपींस के साथ या तो नंबर एक या दूसरे स्थान पर होंगे। इसलिए, यदि जहाज पर कोई हमला होता है, तो अधिकांश क्रू सदस्य वे हमारे नागरिक हैं और हम उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं।

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Published April 3rd, 2024 at 08:18 IST

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