'जो देश सैनिकों की रक्षा करना नहीं जानता, उसका भविष्य कभी सुरक्षित नहीं हो सकता', रिपब्‍लिक टीवी के फोर्सेस फर्स्‍ट कॉन्‍क्‍लेव में बोले राजनाथ सिंह

'रिपब्लिक फोर्सेस फर्स्ट कॉन्क्लेव: भारत- द डिफेंस पावरहाउस' के तीसरे संस्करण में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने सैनिकों के सम्मान में बड़ी बात कही।

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Rajnath Singh at Republic Forces First Conclave
Rajnath Singh at Republic Forces First Conclave | Image: Republic

Forces First Conclave: रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क द्वारा आयोजित 'फोर्सेस फर्स्ट - भारत द डिफेंस पावरहाउस कॉन्क्लेव' में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने हिस्सा लिया। 'नेशन फर्स्ट' की भावना से देश के सबसे बड़े रक्षा कार्यक्रम फोर्सेस फर्स्ट कॉन्क्लेव' (Forces First Conclave) के तीसरे संस्करण का आयोजन राजधानी दिल्ली में किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सैनिकों की शौर्य और पराक्रम पर पूरे देश को गर्व है।

'रिपब्लिक फोर्सेस फर्स्ट कॉन्क्लेव: भारत- द डिफेंस पावरहाउस' का तीसरा संस्करण रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रिपब्लिक मीडिया नेटवर्क के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी द्वारा पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ शुरू हुआ। यह कॉन्क्लेव रक्षा क्षेत्र के दिग्गज, सैन्य विशेषज्ञ, इनोवेटर्स और उद्योग जगत के कई हस्तियों को एक मंच पर लाता है। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, पिछले 12 सालों में रक्षा क्षेत्र में बड़ा बदलाव किया गया, डिफेंस सेक्टर को आत्मनिर्भर बनाया गया है।

सैनिकों का सम्मान हर देश के लिए जरूरी- रक्षा मंत्री  

Forces First Conclave में बोलते हुए रक्षा मंत्री ने कहा, 'जो देश अपने सैनिक का सम्मान करना नहीं जानता, उसका भविष्य कभी सही नहीं हो सकता। हमारी सरकार में सैनिकों का सम्मान ऊपर रखा गया है। रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि सैनिकों का मनोबल बढ़ाने के लिए आधुनिक हथियार और तकनीक का होना जरूरी है और पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने इसके लिए विशेष काम किया।'

भारत की सुरक्षा के लिए क्या है जरूरी रक्षा मंत्री ने बताया

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा, ‘भारत की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सबसे अहम कदम औद्योगिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करना रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि असली राष्ट्रीय ताकत सिर्फ सेना के आकार से नहीं, बल्कि संकट के समय अपनी अहम जरूरतों को पूरा करने की देश की क्षमता से तय होती है। उन्होंने आगे कहा कि जब कोई देश गोला-बारूद, नेविगेशन सिस्टम, मिसाइल, रडार और ड्रोन जैसी महत्वपूर्ण सैन्य जरूरतों के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर रहता है, तो उसकी समग्र रणनीतिक और सैन्य स्वायत्तता सीमित हो जाती है।’

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आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति

राजनाथ सिंह ने आगे कहा, "रक्षा क्षेत्र में भारत को मजबूत करने के लिए हमने जो सबसे बड़ा काम किया है, वह रक्षा औद्योगिक क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है।" रक्षा मंत्री ने सीमा पार आतंकवाद के प्रति भारत के बदले पर बोलते हुए 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता का जिक्र किया। उन्होंने कहा, "आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस हमारे लिए सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि कार्रवाई का एक तरीका है। हम आतंकियों के घरों में घुसकर उन पर हमला करेंगे। पूरी दुनिया ने 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान यह देखा है। आतंकवाद के खिलाफ भारत की 'जीरो टॉलरेंस' की नीति सिर्फ बातों तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह स्पष्ट रूप से हमारे कार्यों में भी दिखती है।"

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Published By:
 Rupam Kumari
पब्लिश्ड