'खाकी' में IPS अमित लोढ़ा के किरदार निभाने से आपने क्या सीखा? करन टैकर ने दिया जवाब, बताया कितना मुश्किल था रोल
रिपब्लिक भारत के 'मंथन समिट 2026' में रील और रियल लाइफ के सूरमाओं का एक संगम देखने को मिला। इस खास सत्र में अभिनेता करन टैकर और जांबाज आईपीएस अधिकारी अमित लोढ़ा एक साथ नजर आए। सुपरहिट वेब सीरीज 'खाकी: द बिहार चैप्टर' में आईपीएस अमित लोढ़ा का मुख्य किरदार निभाने वाले करन टैकर ने साझा किया कि इस ऐतिहासिक रोल को पर्दे पर जीना उनके लिए कितना चुनौतीपूर्ण था।
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रिपब्लिक भारत के 'मंथन समिट 2026' में इस बार एक बेहद खास और दिलचस्प रहा। समिट में सुपरहिट वेब सीरीज 'खाकी: द बिहार चैप्टर' के रील हीरो यानी अभिनेता करन टैकर और उनके ठीक बगल में बैठे थे असली जिंदगी के जांबाज IPS अधिकारी अमित लोढ़ा। मंच पर जब करन से पूछा गया कि अमित लोढ़ा का किरदार निभाने से उन्होंने क्या सीखा और यह कितना चुनौतीपूर्ण था, तो अभिनेता करन टैकर ने बेहद बेबाकी से अपने अनुभव साझा किए।
रील और रियल हीरो एक साथ मंच पर
अमित लोढ़ा की मौजूदगी ने सत्र को और भी रोमांचक बना दिया। करन टैकर ने बातचीत की शुरुआत करते हुए कहा कि एक जीवित लीजेंड के सामने बैठकर उनके ही किरदार पर बात करना अपने आप में नर्वस करने वाला है। करन ने बताया, जब अमित सर खुद आपको स्क्रीन पर देखने वाले हों, तो जिम्मेदारी का बोझ सौ गुना बढ़ जाता है। आपको उनकी बॉडी लैंग्वेज, उनकी ईमानदारी और उनके कड़क मिजाज को हूबहू पर्दे पर उतारना था। यह मेरे करियर का सबसे मुश्किल रोल था।
किरदार से क्या सीखा?
इस रोल से मिली सीख पर बात करते हुए करन ने कहा कि वर्दी पहनने के बाद उन्हें समझ आया कि पुलिस अधिकारियों का जीवन कितना अहम होता है। करन ने अमित लोढ़ा की तरफ देखते हुए कहा, मैंने सर से सीखा कि एक सच्चा लीडर वही है जो भारी दबाव और विपरीत परिस्थितियों में भी अपना धैर्य न खोए। इस किरदार ने मुझे मानसिक रूप से मजबूत होना और अपनी टीम को साथ लेकर चलना सिखाया।
अमित लोढ़ा ने भी की तारीफ
मंच पर मौजूद IPS अमित लोढ़ा ने भी करन की मेहनत को सराहा। उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा कि करन ने स्क्रीन पर उनके काम और भावनाओं के साथ पूरा न्याय किया है। करन ने अंत में बताया कि बिहार की पृष्ठभूमि को समझने और एक पुलिस वाले के तौर-तरीकों को आत्मसात करने के लिए उन्हें काफी कड़ा अभ्यास करना पड़ा था। 'मंथन समिट 2026' के इस सत्र ने दर्शकों को यह समझने का मौका दिया कि पर्दे के पीछे की कड़ी मेहनत ही किसी किरदार को यादगार बनाती है।