अपडेटेड 30 March 2025 at 22:53 IST
भोपाल गैस त्रासदी के दौरान यदि नियामकीय व्यवस्था होती, तो चीजें भिन्न होतीं: उपराष्ट्रपति धनखड़
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को 1984 की भोपाल गैस त्रासदी को ‘‘बड़ी पर्यावरणीय लापरवाही’’ का मामला बताया।
- भारत
- 2 min read

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने रविवार को 1984 की भोपाल गैस त्रासदी को ‘‘बड़ी पर्यावरणीय लापरवाही’’ का मामला बताया और कहा कि यदि उस समय वर्तमान स्तर की नियामकीय व्यवस्था होती, तो चीजें अलग होतीं। धनखड़ ने यह भी कहा कि विकसित देशों को पर्यावरण संबंधी सोच में राजनीतिक सीमाओं से आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि देशों को ऐसे मॉडल अपनाने चाहिए, जहां ग्रहीय स्वास्थ्य मानव समृद्धि और कल्याण का आधार बन जाए।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा यहां आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भोपाल गैस त्रासदी से ‘‘अब भी सबक नहीं सीखा गया है।’’
उन्होंने गैस रिसाव की इस घटना को ‘‘बड़ी पर्यावरणीय लापरवाही’’ बताया।
उन्होंने कहा, ‘‘...जरा सोचिए कि जागरूकता की कमी कितनी दयनीय थी। हमारे पास एनजीटी जैसी कोई संस्था नहीं थी। हमारे पास कोई नियामकीय व्यवस्था नहीं थी, जो इस मुद्दे का समाधान कर पाती। अगर उस समय वर्तमान स्तर की कोई नियामकीय व्यवस्था होती, तो चीजें बहुत अलग होतीं।’’
Advertisement
उपराष्ट्रपति ने कहा कि पर्यावरण की सुरक्षा और संरक्षण के लिए मानव के नैतिक दायित्वों को रेखांकित करने के लिए पर्यावरणीय नैतिकता को विकसित करने और उसमें विश्वास करने की वैश्विक आवश्यकता है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें यह समझना होगा कि यह ग्रह केवल हमारा नहीं है। हम इसके मालिक नहीं हैं। ऐसी स्थिति में, मनुष्य को प्रकृति और अन्य प्राणियों के साथ सामंजस्य बिठाकर रहना सीखना होगा।’’
Advertisement
Published By : Deepak Gupta
पब्लिश्ड 30 March 2025 at 22:53 IST