ममता बनर्जी को फिर बड़ा झटका, बागी TMC विधायक ऋतब्रत बनर्जी LoP बने रहेंगे, कलकत्ता HC ने नियुक्ति पर रोक हटाने से किया इनकार

कलकत्ता हाई कोर्ट से गुरुवार को TMC सुप्रीमो ममता बनर्जी को बड़ा सियासी झटका लगा है। कोर्ट ने TMC के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है।

  • Facebook Share Icon
  • Twitter Share Icon
  • WhatsApp Share Icon
 
Follow : Google News Icon
TMC will approach the court over the appointment of Ritabrata Banerjee as the Leader of the Opposition
ममता बनर्जी को फिर बड़ा झटका, बागी TMC विधायक ऋतब्रत बनर्जी LoP बने रहेंगे, | Image: ANI

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार से तृणमूल कांग्रेस (TMC) सुप्रीमो ममता बनर्जा उबर भी नहीं पा रही है कि उन्हें झटके पर झटके लगा रहा है। अब पूर्व मुख्यमंत्री को कलकत्ता हाई कोर्ट से एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। कोर्ट ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त करने के विधानसभा अध्यक्ष के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से साफ इनकार कर दिया। अदालत के इस आदेश के बाद फिलहाल स्पीकर का निर्णय लागू रहेगा।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने गुरुवार को उस याचिका पर कोई अंतरिम आदेश पारित करने से इनकार कर दिया, जिसमें पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष के उस फैसले को चुनौती दी गई थी। जिसके तहत पार्टी से निकाले गए नेता रिताब्रत बनर्जी को विपक्ष का नेता (LoP) मान्यता दी गई थी। न्यायमूर्ति कृष्णा राव की एकल पीठ ने TMC के वरिष्ठ नेता और ममता बनर्जी के करीबी शोभनदेब चट्टोपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता के पक्ष में प्रथम दृष्टया ऐसा कोई ठोस आधार नहीं बनता, जिसके आधार पर अंतरिम राहत दी जा सके

ऋतब्रत बनर्जी LoP बने रहेंगे-HC

जस्टिस कृष्ण राव ने संबंधित पक्षों को तीन सप्ताह के भीतर विरोध में हलफनामा और उसके बाद दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी। कोर्ट द्वारा कोई अंतरिम राहत नहीं देने पर, ममता बनर्जी को विपक्ष का नेता मानने का अध्यक्ष का फैसला फिलहाल मानना होगा। वहीं, इस फैसले के बाद ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा के आगामी बजट सत्र के दौरान इस पद पर बने रहने की अनुमति मिल गई।

कोर्ट के फैसले से ममता को लगा झटका

यह याचिका वरिष्ठ TMC नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय ने दायर की थी, जिन्होंने पार्टी के भीतर अभूतपूर्व बगावत के बीच बनर्जी को विपक्ष का नेता नियुक्त करने के अध्यक्ष रथिंद्र बोस के फैसले को चुनौती दी थी। बता दें कि तृणमूल कांग्रेस के अंदर चल रही बगावत में कुल 58 MLA पहले ही पश्चिम बंगाल असेंबली में एक अलग गुट बना चुके हैं, जहां ऋतब्रत बनर्जी को स्पीकर रथींद्र बोस ने विपक्ष के नेता के तौर पर मान्यता दे दी है।

Advertisement

विधानसभा से लेकर लोकसभा तक लड़ाई

बगावत केवल विधानसभा तक ही सीमित नहीं है। लोकसभा में,काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में TMC सांसदों का एक धड़ा त्रिपुरा स्थित नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर गया है। सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर सदन में बैठने की अलग व्यवस्था की मांग भी की है, जो पार्टी के भीतर बढ़ती दरार का संकेत है।

फैसले पर कल्याण बनर्जी ने क्या कहा?

वहीं, हाई कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए TMC सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि कोर्ट ने केवल याचिका को स्वीकार किया है और कोई अंतरिम राहत नहीं दी है। हलफनामा दाखिल करने के निर्देश दिए गए हैं और मामला अंतिम सुनवाई के लिए आएगा। अंतिम सुनवाई जुलाई में होगी।

Advertisement

ऋतब्रत बनर्जी ने फ्लोर टेस्ट के लिए हामी भारी

इस बीच पार्टी से निकाले गए नेता ऋतब्रत बनर्जी ने मंगलवार को राज्य में राजनीतिक घटनाक्रम पर अटकलों के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा में फ्लोर टेस्ट के विचार का समर्थन किया और कहा कि इस तरह के कदम से चल रही बहस और दावों पर विराम लग जाएगा। इस मुद्दे पर बोलते हुए, बनर्जी ने कहा कि अगर स्पीकर को जरूरी लगे, तो विधायकों की संख्या का पता लगाने के लिए फ्लोर टेस्ट कराया जाना चाहिए।

यह भी पढ़ें: 'जिस काली-कमाई के पैसे...', फूट के दावे को लेकर फिर राजभर पर बरसे अखिलेश
 

Published By:
 Rupam Kumari
पब्लिश्ड