'निडर नेतृत्व, अटूट देशभक्ति और निस्वार्थ जनसेवा...', श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर राजनाथ सिंह ने यूं किया याद, दी श्रद्धांजलि
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें नमन किया। राजनाथ सिंह ने उन्हें राष्ट्र-निर्माण को समर्पित दूरदर्शी नेता बताते हुए कहा कि उनका निडर नेतृत्व और देशभक्ति पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।
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Shyama Prasad Mukherjee 125th Birth Anniversary: 'भारतीय जन संघ' की स्थापना करने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आज (6 जुलाई) 125वीं जयंती है। इस मौके पर हर कोई उन्हें याद कर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। इस मौके पर केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी उन्हें नमन किया। उन्होंने कहा कि श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्श पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।
राजनाथ सिंह ने दी श्रद्धांजलि
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने X पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा, "डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनकी 125वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। एक दूरदर्शी राजनेता, प्रख्यात विद्वान और राष्ट्र-निर्माण के प्रति समर्पित व्यक्तित्व के रूप में, उन्होंने अपना जीवन देश की एकता को बनाए रखने, लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने और राष्ट्रीय अखंडता को बढ़ावा देने के लिए समर्पित कर दिया।"
उन्होंने कहा कि निडर नेतृत्व, अटूट देशभक्ति और निस्वार्थ जनसेवा के उनके आदर्श पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। एक मजबूत, एकजुट, आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण के हमारे सामूहिक प्रयासों में उनकी अमिट विरासत हमारा मार्गदर्शन करे।
शिक्षा के क्षेत्र में बनाया बड़ा कीर्तिमान
6 जुलाई 1901 को कोलकाता के एक प्रतिष्ठित परिवार में जन्मे डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी बचपन से ही असाधारण बुद्धि के धनी थे। उनके पिता आशुतोष मुखर्जी कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश और कलकत्ता विश्वविद्यालय के कुलपति थे। पिता के पदचिह्न पर चलते हुए श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने भी शिक्षा के क्षेत्र में बड़ा मुकाम हासिल किया। केवल 33 साल की आयु में कलकत्ता विश्वविद्यालय के सबसे कम उम्र के कुलपति (Vice-Chancellor) बने थे।
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मुखर्जी स्वतंत्र भारत के पहले उद्योग और आपूर्ति मंत्री बने थे। देश की पहली औद्योगिक नीति लाने में उनका अहम योगदान था। हालांकि, नेहरू कैबिनेट की नीतियों, विशेषकर कश्मीर नीति और तुष्टिकरण के खिलाफ आवाज उठाते हुए उन्होंने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद उन्होंने 1951 में 'भारतीय जन संघ' की स्थापना की, जो आज भारतीय जनता पार्टी (BJP) का वैचारिक आधार स्तंभ है।
कश्मीर के लिए सर्वोच्च बलिदान
जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली धारा 370 के खिलाफ उन्होंने ही देश को नारा दिया था- "एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे।" कश्मीर में बिना परमिट प्रवेश के काले कानून के विरोध में आंदोलन करते हुए 1953 में उन्होंने अपनी गिरफ्तारी दी थी, जिसके कुछ ही दिनों बाद रहस्यमय परिस्थितियों में जेल में उनका निधन हो गया।