खतरे का दूसरा नाम हैं QRT जवान! जानें कैसे होता है चयन और कितनी खतरनाक होती है इनकी कमांडो ट्रेनिंग
QRT ऑपरेशन्स में बिजली जैसी फुर्ती और पलक झपकते ही निर्णय लेने की क्षमता की जरूरत होती है। इस टीम में चयन के लिए सामान्य तौर पर 35 साल से कम आयु के युवाओं को प्राथमिकता दी जाती है।
- भारत
- 3 min read

QRT Team: सुरक्षा बलों और पुलिस महकमे में क्यूआरटी (Quick Reaction Team- त्वरित कार्य बल) को रीढ़ की हड्डी माना जाता है। किसी भी आपातकालीन स्थिति, आतंकवादी हमले, बंधक संकट या फिर दंगे जैसे हालातों में सबसे पहले मोर्चा संभालने की जिम्मेदारी इसी विंग की होती है। इतने संवेदनशील और जोखिम भरे काम के लिए QRT में हर किसी को शामिल नहीं किया जा सकता। इस विशेष टीम का हिस्सा बनने के लिए कार्मिकों को बेहद ही कड़े और अत्याधुनिक चयन मानकों से गुजरना पड़ता है।
आइए जानते हैं कि QRT टीम में चयन की प्रमुख कसौटियां क्या होती हैं और उन्हें 'सुपर कॉप' बनाया तैयार किया जाता है...
NSG मानकों पर आधारित शारीरिक परीक्षण
QRT टीम का हिस्सा बनने के लिए सबसे पहली और अनिवार्य शर्त बैटल फिजिकल एफिशिएंसी टेस्ट (BPET) को पास करना होता है। यह कोई सामान्य शारीरिक परीक्षा नहीं होती, बल्कि इसका आयोजन देश के सबसे प्रतिष्ठित कमांडो बल NSG (National Security Guard) के कड़े मानकों के अनुरूप किया जाता है।
टेस्ट में कार्मिकों को भारी युद्धक हथियारों और साजो-सामान (कॉम्बैट गियर) के साथ तय समय सीमा के भीतर दौड़, बाधा पार करना (ऑब्स्टेकल कोर्स) और रेंगने जैसी कठिन शारीरिक चुनौतियों को पूरा करना होता है। यह टेस्ट कार्मिक के स्टैमिना और युद्ध जैसी परिस्थितियों में उसकी शारीरिक क्षमता को परखने के लिए लिया जाता है।
Advertisement
आयु सीमा और मेडिकल फिटनेस
QRT ऑपरेशन्स में बिजली जैसी फुर्ती और पलक झपकते ही निर्णय लेने की क्षमता की जरूरत होती है। इस टीम में चयन के लिए सामान्य तौर पर 35 साल से कम आयु के युवाओं को प्राथमिकता दी जाती है। इसके साथ ही, उनका चिकित्सकीय रूप से पूरी तरह फिट (SHAPE-1 कैटेगरी) होना अनिवार्य है। शारीरिक रूप से अत्यधिक सक्षम और मानसिक रूप से सतर्क कार्मिक ही इस विशेष बल का हिस्सा बन पाते हैं।
चयन के बाद कठिन प्रशिक्षण
जो कार्मिक शारीरिक और चिकित्सकीय परीक्षाओं को पास कर लेते हैं, उन्हें सीधे मैदान में नहीं उतारा जाता। उन्हें कड़ी ट्रेनिंग दी जाती है। क्यूआरटी (QRT) जवानों को मिलने वाले इस कड़े प्रशिक्षण में उन्हें आतंकवाद विरोधी अभियानों (काउंटर टेरर ऑपरेशन) को अंजाम देने की खास रणनीति सिखाई जाती है। इसके साथ ही, बंद कमरों, संकरी गलियों या बहुमंजिला इमारतों के भीतर आतंकियों से आमने-सामने लड़ने के लिए उन्हें क्लोज क्वार्टर बैटल (CQB) में माहिर किया जाता है।
Advertisement
ट्रेनिंग के दौरान उन्हें अत्याधुनिक हथियार चलाने और एडवांस फायरिंग का कड़ा अभ्यास कराया जाता है, जिससे वे हिलते हुए टारगेट पर भी अचूक निशाना लगा सकें। किसी भी संकट में पूरी टीम के साथ मिलकर बिना किसी शोर-शराबे के ऑपरेशन को सफल बनाने के लिए उनका सामरिक कौशल निखारा जाता है।
इसके अलावा, विमान, बस या ट्रेन जैसी जगहों पर बंधकों को सुरक्षित छुड़ाने के लिए उन्हें एंटी-हाइजैक ट्रेनिंग भी दी जाती है। इन सबके साथ, भारी दबाव और खतरे के बीच भी शांत रहकर सही फैसला लेने के लिए जवानों में मानसिक दृढ़ता विकसित की जाती है, जो उन्हें मनोवैज्ञानिक रूप से बेहद मजबूत बनाती है।