रंग लाई मेहनत: 9 घंटे की कड़ी मशक्कत बाद बोरवेल से निकला 3 साल का बच्चा, 30 फीट की गहराई पर अटका था; NDRF ने यूं किया सफल रेस्क्यू
Hosiyarpur Borewell Rescue: 3 साल का बच्चा खेलते समय बोरवेल में गिर गया था। वे 30 फीट पर जाकर अटक गया था। 9 घंटे बाद देर रात 12.40 बजे बच्चे को बोरवेल से सुरक्षित निकाल लिया गया।
- भारत
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Punjab news: पंजाब के होशियापुर में गांव चक सवाना में बोरवेल में गिरे बच्चे गुरकरण सिंह (वंशु) को सुरक्षित बाहर निकाला है। तीन साल का बच्चा करीब 250 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था। NDRF की कई टीमें रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटी थी। कई घंटों की मशक्कत के बाद बच्चे को बोरवेल से बाहर निकाला गया। उसे फौरन अस्पताल लेकर जाया गया।
बच्चा साइट के पास खेल रहा था। इसी दौरान वह गलती से गहरे बोरवेल में गिर गया। घटना के तुरंत बाद गांववालों ने शोर मचाया और डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन को इसकी जानकारी दी।
बच्चे को ले जाया गया अस्पताल
होशियारपुर के SSP संदीप कुमार मलिक ने कहा कि सभी के सामूहिक प्रयासों से बच्चे को सुरक्षित बचा लिया गया है। बच्चे को अस्पताल ले जाया जा रहा है। हम ईश्वर का धन्यवाद करते हैं।
बच्चे को बोरवेल से निकालते ही NDRF के जवान बच्चे को गोद में उठाकर एंबुलेंस तक ले गए। बच्चे का चेहरा मिट्टी से सना हुआ था, लेकिन उसकी हालत स्थिर बताई जा रही है। फिलहाल उसे मेडिकल जांच और इलाज के लिए अस्पताल भेज दिया गया है।
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30 फीट पर जाकर अटक गया था बच्चा
बच्चा शुक्रवार (15 मई) शाम करीब 4 बजे बोरवेल में गिरा था और लगभग 9 घंटे बाद देर रात 12.40 बजे बच्चे को सुरक्षित निकाल लिया गया। बताया जा रहा है कि बोरवेल कम चौड़ा था, जिसकी वजह से बच्चे बीच में ही 30 फीट पर जाकर अटक गया। जब वे काफी देर तक घर नहीं लौटने पर तो परिजनों ने बच्चे की तलाश शुरू की। इसी दौरान उसके रोने की आवाज बोरवेल से सुनाई दी। इसके बाद घरवाले काफी घबरा गए। गांव में अफरा-तफरी मच गई और तुरंत जिला प्रशासन को सूचना दी गई। इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ।
यूं हुआ सफल रेस्क्यू
डीसी आशिका जैन और SSP संदीप कुमार मलिक रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान वहां डटे रहे। पंजाब सरकार के मंत्री रवजोत सिंह और आम आदमी पार्टी सांसद राजकुमार छब्बेवाल भी पूरी रात बचाव अभियान की निगरानी करते रहे। NDRF की कई टीमें रेस्क्यू में जुटी थी। उन्होंने इसके लिए आधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल किया। बचाव टीम ने पाइप से गड्ढे के अंदर ऑक्सीजन की व्यवस्था की, जिससे बच्चे को सांस लेने में दिक्कत न हो। साथ ही बच्चे को निकालने के लिए जेसीबी से गड्ढे को आसपास से चौड़ा किया गया है।