तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर; पिटीशनर ने कहा- हॉर्स ट्रेडिंग से विजय ने बनाई सरकार

President Rule in Tamil Nadu: सुप्रीम कोर्ट में दायर PIL में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय की सरकार पर हॉर्स ट्रेडिंग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता केके रमेश ने CBI जांच की मांग की है और जांच पूरी होने तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की अपील की।

Follow : Google News Icon  
PIL filed in Supreme Court seeks CBI probe into alleged horse-trading; President Rule In Tamil Nadu
तमिलनाडु में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग, सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका | Image: REPUBLIC

President Rule in Tamil Nadu: तमिलनाडु में हाल ही में बनी सी. जोसेफ विजय की सरकार पर हॉर्स ट्रेडिंग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लग रहे हैं। मदुरै के रहने वाले केके रमेश ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर इस मामले की CBI जांच की मांग की है। साथ ही जांच पूरी होने तक राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की भी अपील की गई है।

विश्वास मत में मिले 144 वोट 

याचिका में दावा किया गया है कि तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) ने अकेले बहुमत नहीं होने के बावजूद विधायकों की खरीद-फरोख्त करके सरकार बना ली। TVK ने विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीती थीं। बहुमत के लिए 118 की जरूरत थी, लेकिन विश्वास मत में उन्हें 144 वोट मिल गए। याचिकाकर्ता का कहना है कि यह समर्थन सामान्य राजनीतिक गठबंधन से नहीं, बल्कि पैसे और सौदेबाजी से हासिल किया गया।

TVK को कैसे मिला अचानक समर्थन?

चुनाव के बाद कांग्रेस, CPI, CPI(M) और IUML जैसी पार्टियों ने TVK को बाहर से समर्थन देने की बात कही। लेकिन असली चौंकाने वाली बात AIADMK के 25 विधायकों का समर्थन था। ये विधायक पार्टी के आधिकारिक व्हिप का उल्लंघन कर विजय सरकार के पक्ष में खड़े हो गए। याचिका में आरोप है कि इन विधायकों को भारी रकम और दूसरे फायदे दिए गए। 

AIADMK में इस फैसले से बड़ी फूट पड़ गई। एक गुट ने स्पीकर से दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की मांग की है। याचिकाकर्ता ने कहा कि 91वें संवैधानिक संशोधन के बाद पार्टी फूट को कोई सुरक्षा नहीं मिलती। दो-तिहाई बहुमत के बिना दूसरे दल में विलय भी माना नहीं जा सकता।

Advertisement

याचिका में क्या-क्या मांगे?

केके रमेश ने अपनी याचिका में केंद्र सरकार, CBI और तमिलनाडु सरकार को पक्षकार बनाया है। उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया लोकतंत्र की भावना के खिलाफ थी। फ्लोर टेस्ट में जो कुछ हुआ, वो साफ सौदेबाजी लगता है। इसलिए विधानसभा भंग कर नई चुनाव कराए जाएं और तब तक राष्ट्रपति शासन लागू रहे। 

याचिकाकर्ता ने खुद को तमिलनाडु का स्थायी निवासी और मतदाता बताते हुए कहा कि उनके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन हुआ है। वकील नरेंद्र कुमार वर्मा के जरिए दायर इस याचिका पर अब सुप्रीम कोर्ट क्या फैसला सुनाता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं।

Advertisement

ये भी पढ़ें:  केरलम सरकार में मंत्रालयों का हुआ बंटवारा, रमेश चेन्निथला बने गृह मंत्री; CM सतीशन के पास वित्त समेत 35 विभाग, LIST
 

Published By:
 Shashank Kumar
पब्लिश्ड