अपडेटेड 28 February 2025 at 16:41 IST
किसी भी न्याय प्रणाली को तभी सशक्त माना जाएगा जब वह... बोलीं राष्ट्रपति मुर्मू
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि अपराधियों में पकड़े जाने और सजा मिलने का डर तथा आम लोगों में न्याय मिलने का भरोसा सुशासन की पहचान है।
- भारत
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राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शुक्रवार को कहा कि अपराधियों में पकड़े जाने और सजा मिलने का डर तथा आम लोगों में न्याय मिलने का भरोसा सुशासन की पहचान है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी न्यायिक प्रणाली को तभी सशक्त माना जाएगा जब वह वास्तव में समावेशी हो। उन्होंने कहा कि 2024 में तीन नए आपराधिक कानूनों का लागू होना भारतीय इतिहास में एक महत्वपूर्ण क्षण था।
मुर्मू ने यहां राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (एनएफएसयू) के तीसरे दीक्षांत समारोह में कहा, ‘‘अपराध पर नियंत्रण, अपराधियों में पकड़े जाने और सजा मिलने का डर तथा आम लोगों में न्याय मिलने का भरोसा, यही सुशासन की पहचान है। हमारे देश में न्याय पर आधारित सामाजिक व्यवस्था को सर्वोत्तम माना जाता है।’’
इस मौके पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी मौजूद थे। राष्ट्रपति ने एनएफएसयू से स्नातक करने वाले विद्यार्थियों से यह सुनिश्चित करने को कहा कि कोई भी व्यक्ति वित्तीय कारणों से न्याय से वंचित न रहे। मुर्मू ने कहा, ‘‘परंपरा और विकास के जरिये हम एक विकसित देश के निर्माण की ओर अग्रसर हैं। कोई भी न्याय प्रणाली तभी सशक्त मानी जाएगी जब वह समावेशी हो। समाज के सभी वर्गों, खासकर कमजोर और वंचितों को न्याय उपलब्ध कराना विश्वविद्यालय से निकलने वाले छात्रों का लक्ष्य होना चाहिए।’’
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उन्होंने कहा, ‘‘आपको इस तरह काम करना चाहिए कि देश के अंतिम व्यक्ति तक न्याय की पहुंच हो सके और यह सुनिश्चित किया जाए कि वित्तीय कारणों से कोई भी न्याय से वंचित न रहे।’’ राष्ट्रपति ने तीन नए आपराधिक कानूनों भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और भारतीय साक्ष्य अधिनियम के लागू होने के बारे में भी बात की, जिन्होंने ब्रिटिश युग के कानूनों की जगह ली है।
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मुर्मू ने इस बात पर प्रकाश डाला कि न्याय प्रणाली में यह देश के लिए एक महत्वपूर्ण क्षण था जब पुराने आपराधिक कानूनों को हटाकर तीन नए कानूनों को लागू किया गया। राष्ट्रपति ने कहा कि तीन नये आपराधिक कानूनों में अपराध जांच और साक्ष्य से संबंधित बदलाव किये गये हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘जिन मामलों में सजा की अवधि सात वर्ष या उससे अधिक है, उनमें फोरेंसिक विशेषज्ञ का घटनास्थल पर जाकर जांच करना अब अनिवार्य हो गया है। भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता ने सभी राज्यों में समयबद्ध तरीके से फोरेंसिक सुविधाओं के विकास का प्रावधान किया है। कई कानूनों में समयबद्ध फोरेंसिक जांच को अनिवार्य बनाया गया है।'
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राष्ट्रपति ने कहा कि इन बदलावों से फोरेंसिक विशेषज्ञों की मांग बढ़ेगी।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी में तेजी से हो रहे बदलावों के कारण, विशेष रूप से डिजिटल तकनीक और कृत्रिम मेधा के क्षेत्र में, फोरेंसिक विज्ञान विशेषज्ञों की क्षमताएं बढ़ रही हैं लेकिन साथ ही, अपराधी भी नए तरीके खोज रहे हैं।’’ मुर्मू ने कहा, ‘‘हमारी पुलिस, अभियोजन और आपराधिक न्याय वितरण प्रणाली से जुड़े लोग अपराध को नियंत्रित करने और न्याय को सुलभ बनाने में तभी सफल हो सकते हैं, जब वे अपराधियों से अधिक होशियार, तत्पर और सतर्क होंगे।’’
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि एनएफएसयू के योगदान से एक सशक्त फोरेंसिक प्रणाली विकसित होगी, दोषसिद्धि दर बढ़ेगी और अपराधी अपराध करने से डरेंगे। कुलपति जे एम व्यास की अध्यक्षता में आयोजित एनएफएसयू के तीसरे दीक्षांत समारोह में 1560 से अधिक विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की गई।
(Note: इस भाषा कॉपी में हेडलाइन के अलावा कोई बदलाव नहीं किया गया है)
Published By : Garima Garg
पब्लिश्ड 28 February 2025 at 16:41 IST