West Bengal: बंगाल में UCC की तैयारी तेज, ड्राफ्ट बिल की समीक्षा के लिए बनी 9 सदस्यीय कमेटी; कौन-कौन शामिल?
पश्चिम बंगाल की सुवेंदु सरकार नेUCC ड्राफ्ट बिल की समीक्षा के लिए आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी किया है। इस 9 सदस्यीय समिति की कमान सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी गई है।
- भारत
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UCC in West Bengal: पश्चिम बंगाल की सुवेंदु अधिकारी सरकार ने राज्य में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code) लागू करने की दिशा में कदम आगे बढ़ा दिए हैं। इसी दिशा में ड्राफ्ट बिल की जांच के लिए 9 सदस्यीय एक्सपर्ट कमेटी का गठन कर दिया गया है। इस समिति की कमान सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई को सौंपी गई है।
सरकार की योजना आगामी अगस्त विधानसभा सत्र में 'समान नागरिक संहिता, पश्चिम बंगाल, 2026 विधेयक' को सदन के पटल पर रखने की है।
जारी हुई अधिसूचना
इस संबंध में एक आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। नोटिफिकेशन के मुताबिक, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 44 (राज्य के नीति निदेशक तत्व) के प्रावधानों के तहत राज्य सरकार ने 'द यूनिफॉर्म सिविल कोड, वेस्ट बंगाल, 2026' का एक ड्राफ्ट बिल तैयार कर लिया है। अब इस विषय की व्यापकता और इसके कानूनी प्रभावों के बारीक परीक्षण और समीक्षा के लिए 9 सदस्यीय विशेषज्ञ समिति का औपचारिक गठन किया गया है।
इस बिल का मुख्य उद्देश्य राज्य के सभी नागरिकों के लिए विवाह, तलाक, निर्वसीयत उत्तराधिकार और वसीयती उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक व्यापक कानूनी ढांचा तैयार करना है। यह कानून पश्चिम बंगाल के सभी निवासियों पर, चाहे वे किसी भी धर्म, विश्वास या समुदाय से हों, समान रूप से लागू होगा।
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सीएम सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि रिटायर्ड सुप्रीम कोर्ट जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई है। यह अपना काम शुरू करेगी और जल्द ही अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। यह एक देश है, इसलिए एक ही कानून होगा। कानूनों के दो सेट नहीं हो सकते। यह बिल्कुल साफ है।"
कमेटी में कौन-कौन शामिल?
जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली इस समिति में मेघालय के पूर्व राज्यपाल तथागत रॉय, वरिष्ठ IAS अधिकारी दुष्यंत नरयाला, शत्रुघ्न सिंह, संघमित्रा घोष, डॉ. रत्ना भट्टाचार्य, गोपालचंद्र मिश्रा, उस्मान गनी मल्लिक, निर्मल्या भट्टाचार्य शामिल हैं।
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हाई-लेवल कमिटी इस प्रस्तावित कानून के हर एक सामाजिक, प्रशासनिक और कानूनी पहलू का बारीकी से अध्ययन करेगी। समिति द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद, राज्य सरकार इसके आधार पर कानून पारित कराने की अगली संवैधानिक प्रक्रिया शुरू करेगी।
उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य है जिसने यूसीसी (UCC) को कानून के रूप में लागू किया है। इसके बाद मध्य प्रदेश, राजस्थान और असम जैसे कई अन्य राज्य भी अपने यहां UCC लागू करने की अंतिम तैयारियों में जुटे हैं। हाल ही में महाराष्ट्र में भी UCC के ड्राफ्ट के लिए 7 सदस्यीय कमेटी बनाई थी।