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Updated October 3rd, 2020 at 18:27 IST

हाथरस केस पर बोले सीएम योगी- ‘सजा देने के कानूनी तरीकों में कर सकते हैं बदलाव’

हाथरस मामले पर चारों ओर से आलोचना झेल रहे उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा है कि ‘दोषियों को सजा देना प्रशासन की ज़िम्मेदारी है।

Reported by: Sakshi Bansal
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हाथरस मामले पर चारों ओर से आलोचना झेल रहे उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा है कि ‘दोषियों को सजा देना प्रशासन की ज़िम्मेदारी है।’ सीएम ने कहा कि ‘लोगों को इंसाफ दिलाने के लिए उनका पुलिस बल किसी भी हद तक जा सकता है और सरकार सजा देने के कानूनी तरीकों में भी बदलाव कर सकती है।’

मीडिया को संबोधित करते हुए, सीएम योगी ने कहा- “यूपी पुलिस देश में सबसे बड़ा पुलिस बल है। हम सजा देने के कानूनी तरीकों में भी बदलाव कर सकते हैं। एक तरफ, हमें दोषियों के साथ सख्त रहना पड़ता है तो दूसरी तरफ, हमें पीड़ितों के साथ नरमी बरतनी चाहिए। लोगों को इंसाफ दिलाने के लिए पुलिस बल को किसी भी हद तक जाना चाहिए।”

शुक्रवार को सीएम ने दोषियों को सख्त से सख्त सजा देने की प्रतिज्ञा ली थी। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा- 'उत्तर प्रदेश में माताओं-बहनों के सम्मान-स्वाभिमान को क्षति पहुंचाने का विचार मात्र रखने वालों का समूल नाश सुनिश्चित है। इन्हें ऐसा दंड मिलेगा जो भविष्य में उदाहरण प्रस्तुत करेगा। आपकी उत्तर प्रदेश सरकार प्रत्येक माता-बहन की सुरक्षा व विकास हेतु संकल्पबद्ध है।'

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एसपी समेत अन्य पुलिसकर्मियों को किया निलंबित

हाथरस मामले पर लापरवाही बरतने वाले अफसरों को निलंबित कर दिया गया है। बता दें, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुरूआती जांच रिपोर्ट के आधार पर जिले के एसपी, CO, इंस्पेक्टर और कुछ अन्य अधिकारियों को निलंबित करने का निर्देश दिया है।

न्यूज एजेंसी ANI की खबर के मुताबिक इन सभी लोगों का नार्को पॉलीग्राफ टेस्ट भी कराया जाएगा। निलंबित किए गए अधिकारियों की लिस्ट में एसपी विक्रांत वीर, सीओ राम शब्द, इंस्पेक्टर दिनेश कुमार वर्मा, SI जगवीर सिंह, हेड कॉन्स्टेबल महेश पाल शामिल हैं। बता दें, शुक्रवार को ही SIT की टीम ने अपनी जांच रिपोर्ट सौंपी है। जिसके बाद इन सभी को निलंबित किया गया।

हाथरस केस

ग़ौरतलब है कि 14 सितम्बर को हाथरस में चार लोगों ने 19 वर्षीय लड़की से कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया था और मंगलवार को दिल्ली के सफ़दरजंग अस्पताल में उसकी मौत हो गई। पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने जबरन उसका अंतिम संस्कार किया जिसे स्थानीय पुलिस ने खारिज कर दिया है। साथ ही राज्य के एडीजी (कानून व्यवस्था) प्रशांत कुमार का कहना है कि ''एफएसएल रिपोर्ट ने यह स्पष्ट कर दिया है कि महिला के साथ रेप या सामूहिक दुष्कर्म नहीं हुआ था।''

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Published October 3rd, 2020 at 18:27 IST

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