'अरे! तुम क्या देख लोगे, कट्टरपंथी और कठमुल्लों को तो खुद मुस्लिम समुदाय नहीं छोड़ेगा'- वक्फ बिल से पहले विनोद बंसल की दो टूक
विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने स्वतंत्र भारत में गढ़े गए कथित झूठों पर तीखा प्रहार किया है।
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VHP spokesperson Vinod Bansal: विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने स्वतंत्र भारत में गढ़े गए कथित झूठों पर तीखा प्रहार किया है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर कोई कट्टरपंथी मुसलमानों का साथ दे तो वह सेक्युलर कहलाता है, लेकिन हिंदुओं का समर्थन करे तो उसे कम्युनल ठहरा दिया जाता है। इसी तरह, संसदीय कानून का समर्थन करना सांप्रदायिकता और विरोध करना सेक्युलरवाद क्यों माना जाता है? उन्होंने आरोप लगाया कि कट्टरपंथी ताकतें मुस्लिम समाज को भी गुमराह कर रही हैं और उनकी राजनीति का असली शिकार आम नागरिक हो रहा है।
विनोद बंसल ने सोशल मीडिया एक्स पर पोस्ट कर लिखा- ‘देखिए स्वाधीन भारत में कैसे-कैसे झूठ गढ़े गए, यदि कोई कट्टरपंथी मुसलमान का साथ दे तो वह सेक्युलर और यदि हिंदुओं का साथ दे तो वह कम्युनल!! यदि कोई संसदीय कानून का समर्थन करे तो वह कम्युनल किंतु उसका विरोध करें तो सेक्युलर!! जो भारत माता की जय बोलने वाले कम्युनल किंतु जो फिलिस्तीन जिंदाबाद के नारे लगाए वह सेक्युलर!! जो सांसद कानून में संशोधन का समर्थन करे, वह कम्युनल और यदि विरोध करें तो वे सब सेक्युलर!!’
अरे!! तुम क्या देख लोगे, कट्टरपंथी..- विनोद बंसल
विनोद बंसल लिखते हैं कि, 'जब ये सारे झूठ नहीं चले और राजनीतिक दलों ने एक होकर राष्ट्र हित में बिल के समर्थन के लिए स्पष्ट रूप से क्या कह दिया, जो स्वयं को सेकुलर कहते थे वह उन राजनेताओं और राजनीतिक दलों को धमकी देने पर भी उतारू हो गए!! कहते हैं कि मुसलमान देख लेंगे...!! अरे!! तुम क्या देख लोगे, कट्टरपंथी उलेमा और कठमुल्लों को तो स्वयं मुस्लिम समुदाय ही नहीं छोड़ने वाला..!!'
मुस्लिम समाज सबसे ज्यादा परेशान और प्रताड़ित है- विनोद बंसल
विनोद बंसल ने आगे कहा कि, 'पिछले 7 दशकों में जिस प्रकार से देश के गरीबों की खून पसीने की कमाई हुई जमीनों को जिहादी कट्टरपंथियों ने अवैध रूप से कब्जाया और उसकी कमाई को निजी हित में उड़ाया है। उनके कारण ना सिर्फ गैर मुसलमान अपितु, मुस्लिम समाज सबसे ज्यादा परेशान और प्रताड़ित है। भलाई इसी में है कि ये कट्टरपंथी जमात शरीयत का डर दिखा कर, देश में वैमनस्य फैलाने से बाज आए अन्यथा, ये इतने अलग-थलग पढ़ जाएंगे कि इनको कोई सुनने वाला भी नहीं मिलेगा।'