Vande Mataram Row: 'वंदे मातरम्' पर कांग्रेस के एक फैसले से कैसे आया सियासी तूफान? अमित शाह, जेपी नड्डा से विपक्ष तक... किसने क्या कहा?
कांग्रेस वर्किंग कमेटी के अपने सभी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम्' के केवल शुरुआती दो छंद गायन स्पष्ट किए जाने के बाद भाजपा पार्टी पर ताबड़तोड़ हमले कर रही है। भाजपा ने कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत के टुकड़े करने का आरोप लगाया है।
- भारत
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Vande Mataram Row: राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने है। एक तरफ कांग्रेस इस गीत के केवल शुरुआती दो छंदों को ही गाने की बात पर अड़ी हुई है। दूसरी तरफ, भाजपा इसे तुष्टिकरण की राजनीति से जोड़ रही है और कांग्रेस पर राष्ट्रीय गीत के टुकड़े करने का आरोप लगा रही है।
दरअसल, कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) ने बुधवार को स्पष्ट किया कि पार्टी अपने सभी कार्यक्रमों में 'वंदे मातरम्' के केवल शुरुआती दो छंद ही गाएगी। 15 अगस्त को कांग्रेस मुख्यालय में हुए गायन के बाद उपजे विवाद के बीच पार्टी ने अपने 1937 के पुराने फैसले पर ही कायम रहने का निर्णय लिया है।
कांग्रेस पर चौतरफा हमला कर रही बीजेपी
अब इसके बाद भाजपा ने कांग्रेस पर राष्ट्र गीत के अपमान का आरोप लगाते हुए चौतरफा हमले शुरू कर दिए हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने वंदे मातरम् पर कांग्रेस के CWC प्रस्ताव को लेकर तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा, 'कल कांग्रेस पार्टी की कार्यसमिति ने एक आश्चर्यजनक और देशविरोधी फैसला लिया है। उन्होंने अपनी पार्टी के 1937 के प्रस्ताव को फॉलो करते हुए वंदे मातरम् गीत के 2 ही छंद गाने का फैसला किया है। मैं पूरे देश को याद दिलाना चाहता हूं कि 1937 में कांग्रेस पार्टी ने मुस्लिम तुष्टीकरण के लिए वंदे मातरम् के 2 टुकड़े करके देश के विभाजन की नींव डाली थी जिसके बाद 2 राष्ट्र के सिद्धांत को ताकत मिली थी। देश का विभाजन हुआ और पाकिस्तान का जन्म हुआ।'
शाह ने लगाया तुष्टिकरण की राजनीति का आरोप
उन्होंने आगे कहा, 'जब उस ऐतिहासिक गलती को मोदी सरकार ने सुधारकर और पूरा गीत गाकर राष्ट्रीय एकात्मता को फिर एक बार सुदृढ़ करने का प्रयास किया है। हमने सभी सरकारी फंक्शन में इसे पूरा गाने के निर्णय को कानूनी जामा भी पहनाया है। इसकी अवहेलना का कांग्रेस ने निर्णय किया है। कांग्रेस का यह निर्णय इनकी घोर तुष्टीकरण की नीति की पुष्टि करता है। वोट बैंक के तुष्टीकरण के लिए इन्होंने स्वर्गीय बंकिम बाबू के अमर कृति का न केवल अपमान किया है, बल्कि लाखों शहीदों का अपमान किया है जो देश की आजादी का नारा लगाते हुए फांसी पर चढ़ गए थे और जिन्होंने कई साल जेल में काटे थे। आज कांग्रेस पार्टी अपने 1937 के प्रस्ताव को तो मान रही है लेकिन संसद द्वारा बनाए गए कानून को नकार रही है।'
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कांग्रेस के फैसले की निंदा करती है भाजपा- शाह
शाह ने तीखा प्रहार करते हुए कहा, 'मुझे हैरानी है कि राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी एक बार फिर तुष्टिकरण की राजनीति को आगे बढ़ा रही है। देश पहले भी 'वंदे मातरम्' को दो हिस्सों में बंटने देने की गलती कर चुका है और हमने इसके नतीजे भुगते हैं। अब देश को कांग्रेस पार्टी के इस फैसले के खिलाफ एकजुट होना चाहिए और कहना चाहिए कि उनकी तुष्टिकरण की राजनीति अब नहीं चलेगी। भाजपा कांग्रेस पार्टी के इस फैसले की निंदा करती है।'
कांग्रेस के फैसले से देश का विभाजन हुआ- नड्डा
बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल X पर ट्वीट कर लिखा, '1937 के प्रस्ताव का हवाला देकर कांग्रेस ने 'वंदे मारतम्' के केवल दो छंद गाने का निर्णय लिया है। देश को याद रखना चाहिए कि 1937 में तुष्टिकरण की राजनीति के तहत 'वंदे मारतम्' को दो हिस्सों में बांटने के कांग्रेस के फैसले ने दो-राष्ट्र सिद्धांत को बल दिया और अंततः देश का विभाजन हुआ। आज 'वंदे मारतम्' के 150वें वर्ष में आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने इस ऐतिहासिक भूल को सुधारते हुए बंकिम बाबू की अमर कृति के पूर्ण गायन और सभी सरकारी समारोहों में इसे पूर्ण रूप से गाने को कानूनी स्वरूप देने का निर्णय लिया है। कांग्रेस शुरू से ही समझौते, तुष्टिकरण और विभाजनकारी शक्तियों के सामने घुटने टेकने की राजनीति करती रही है। उसने हमेशा राष्ट्रीय नैतिकता, राष्ट्रीय मूल्यों और राष्ट्रीय भावना के साथ समझौता किया है। उस दौर की कांग्रेस इसका जीता-जागता प्रमाण है।'
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जनता कभी माफ नहीं करेगी- नड्डा
नड्डा ने आरोप लगाया कि आज जब स्वतंत्रता के बाद देश अमृतकाल में विकसित भारत की दिशा में स्वाभिमान के साथ पंच प्रण को लेकर आगे बढ़ रहा है, तब भी कांग्रेस गुलामी की मानसिकता और तुष्टिकरण की राजनीति से ग्रसित है। वह अब भी राष्ट्रीय पहचान और अस्मिता के साथ समझौता कर रही है।' उन्होंने कहा कि देश की जनता अब इस कुंठित मानसिकता से अच्छी तरह से वाकिफ है। जो भी पार्टी देश की अस्मिता और राष्ट्रीय पहचान के साथ समझौता करती है, उसे जनता कभी माफ नहीं करेगी।
...कानून को नहीं मानती कांग्रेस- निशिकांत
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा, 'स्वतंत्रता सेनानी वंदे मातरम् गाते हुए फांसी के फंदे पर झूल गए थे। 1937 में कांग्रेस और मुस्लिम लीग मिलकर सरकार बनाना चाहते थे। जिन्ना ने कहा था कि शर्त है कि वंदे मातरम् गाना बंद करना पड़ेगा। पंडित नेहरू ने मुस्लिम वोट के लिए एक कमेटी बनाई कि वंदे मातरम् गाना चाहिए या नहीं। इसके बाद नेहरू जी ने तय कि वंदे मातरम् मुसलमानों के धर्म के खिलाफ है इसलिए इसके केवल 2 स्टैंजा गाए जाएंगे। आज राहुल गांधी, सोनिया गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हम आपके द्वारा बनाए हुए कानून को नहीं मानते हैं। जनता के सोचने और समझने की बात है कि कांग्रेस किस किस्म की राजनीति की तरफ बढ़ रही है।'
जेल कौन गया, गोलियां किसने खाईं?- कांग्रेस का जवाब
भाजपा के इन आरोपों का कांग्रेस ने करारा जवाब दिया है। पार्टी नेता भूपेष बघेल ने कहा, 'वंदे मातरम् गीत कांग्रेस के लोग गाते थे। लाठियां कौन खाता था, कांग्रेसी। जेल कौन गया, कांग्रेसी। गोलियां किसने खाई, कांग्रेसी। उस समय कांग्रेस पार्टी के अलावा और जो दूसरे दल थे वे दूरी बनाकर रखे थे। एक उदाहरण भाजपा बता दे कि वंदे मातरम् गाते हुए भाजपा के कौन लोगों ने लाठी या गोली खाई। एक अवसर है RSS के पास वे जो अपना गाते हैं उसके जगह वंदे मातरम् गाना शुरू कर दें। इस गीत को अपना लें। 1897 में जब कांग्रेस पार्टी का कोलकाता में महा अधिवेशन हुआ और रवींद्र नाथ टैगोर ने इस गीत को गाया उस समय भी 2 छंद गाए गए।'
हम तब भी गाते थे, आज भी गा रहे- इमरान मसूद
वहीं शाह के बयान पर कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने कहा, 'क्या रविंद्र नाथ टैगोर एंटी नेशनल थे? क्या सरदार पटेल एंटी नेशनल थे? क्या उस वक्त के सारे नेता एंटी नेशनल थे? सुभाष चंद्र बोस ने ये बात पूछी थी और उनके पूछने पर रविंद्र नाथ टैगोर ने सलाह दी थी कि 2 छंद रखें जाएं क्योंकि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र होगा जिसमें सभी लोगों का समावेश होगा। ये आज से नहीं गाया जा रहा है। तब भी हम ही गाते थे आज भी हम ही गा रहे हैं।'
सरदार पटेल से बड़े हो गए शाह?- पवन खेड़ा
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कहा कि ये कौन से वर्किंग कमेटी के रिजॉल्यूशन की बात कर रहे हैं। वो रिजॉल्यूशन तो 1937 में हुई थी। क्या इसका मतलब यह है कि अमित शाह अब खुद को सरदार पटेल, महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, राजागोपालाचारी, मौलाना अब्दुल कलाम आजाद से भी बड़ा मानने लगे। वो संविधान सभा के खिलाफ बोल रहे हैं। वो डॉ. अंबेडकर से भी बड़े हो गए? संविधान सभा में देश की हर विचारधारा का व्यक्ति मौजूद था, जब वंदे मातरम् के दो स्टैंजा का अनुमोदन हुआ था। वो यह नहीं बता पा रहे हैं कि पैलेट गन के इस्तेमाल की इजाजत किसने दी। ये या तो वह इतने नकारा हैं कि उन्हें पता ही नहीं कि गोली चलाने का आदेश किसने दिया या फिर उन्हें पता है क्योंकि आदेश उन्होंने खुद दिया था। जो व्यक्ति 20 दिनों तक संसद से भाग गया था, वह अब खुद को सरदार पटेल से भी बड़ा बता रहा है। हम इनकी सुनें या फिर सरदार पटेल की सुनें? हम संविधान सभा की सुनें या अमित शाह की सुनें?