CM सिद्धारमैया आज दे सकते हैं इस्तीफा, मंत्रियों को ब्रेकफास्ट पर बुलाया लेकिन राज्यपाल बेंगलुरु में नहीं, कर्नाटक में अब होगा सियासी नाटक?
कर्नाटक CM सिद्धारमैया आज इस्तीफा दे सकते हैं। उन्होंने ब्रेकफास्ट मीटिंग बुलाई है। लेकिन ताजा जानकारी सामने आई है कि राज्यपाल बेंगलुरु में नहीं है। ऐसे में सिद्धारमैया कैसे इस्तीफा सौंपेंगे इसको लेकर चर्चाएं तेज है। पढ़ें पूरी खबर।
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Karnataka CM Resignation: कर्नाटक की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया आज मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। उन्होंने अपनी कैबिनेट के सभी मंत्रियों को सुबह ब्रेकफास्ट मीटिंग पर बुलाया है। अटकलें तेज हैं कि इस मीटिंग के बाद सिद्धारमैया अपना इस्तीफा राज्यपाल थावरचंद गहलोत को सौंपेंगे।
ब्रेकफास्ट मीटिंग और इस्तीफे की तैयारी
सिद्धारमैया ने कावेरी भवन में सुबह 9 बजे मंत्रियों की बैठक बुलाई है। इसमें डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार समेत बाकी मंत्री और विधायक शामिल होंगे। बैठक के बाद सिद्धारमैया राजभवन जाकर राज्यपाल थावरचंद गहलोत को इस्तीफा सौंप सकते हैं।
राज्यपाल बेंगलुरु में है ही नहीं
लेकिन अब एक नया ट्विस्ट ये सामने आया है कि राज्यपाल थावरचंद गहलोत बेंगलुरु में मौजूद ही नहीं हैं। परिवार में इमरजेंसी के कारण वे अपने गृह नगर गए हुए हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय ने कहा है कि अगर राज्यपाल उपलब्ध नहीं रहे तो इस्तीफा उनके कार्यालय को सौंपा जा सकता है।
डिके शिवकुमार बन सकते हैं नए मुख्यमंत्री
कांग्रेस हाईकमान के निर्देश पर यह बदलाव हो रहा है। डीके शिवकुमार को नए मुख्यमंत्री बनाए जाने की मजबूत चर्चा है। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडल में भी फेरबदल हो सकता है और 15-20 नए चेहरे शामिल किए जा सकते हैं। कांग्रेस प्रदेश प्रभारी रणदीप सुरजेवाला भी बेंगलुरु पहुंच चुके हैं।
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ढाई-ढाई साल का फॉर्मूला
कांग्रेस सरकार बनते वक्त ढाई-ढाई साल के सीएम फॉर्मूले की चर्चा रही थी। सिद्धारमैया के करीब ढाई साल पूरे होने वाले हैं। हालांकि पार्टी ने पहले इसे सिरे से खारिज किया था, लेकिन अब लगता है कि हाईकमान इस पर अमल कर रहा है। कई कांग्रेस नेताओं ने कहा कि आज की बैठक में साफ हो जाएगा कि आगे क्या होगा। सिद्धारमैया ने कल कहा था कि- 'कल मैं बोलूंगा'। अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन सियासी गलियारों में इस्तीफे की तैयारी चल रही है। कर्नाटक की जनता और राजनीतिक हलकों की नजरें आज इसी पर टिकी हुई हैं।