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Updated May 14th, 2024 at 18:57 IST

एक देश-एक चुनाव के मुद्दे पर फारूक अब्दुल्ला का आया बयान- हम तैयार हैं लेकिन हमारी गुजारिश है...

फारूक अब्दुल्ला ने कहा, 'हम लोग हर वक्त तैयार थे। ये एक देश-एक चुनाव की बात कर रहे हैं। हमने गुजारिश की थी कि शुरूआत जम्मू-कश्मीर से कीजिए।'

Reported by: Digital Desk
Edited by: Sagar Singh
Farooq Abdullah on one Nation one election
एक देश-एक चुनाव पर आया फारूक अब्दुल्ला का बयान | Image:PTI
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One Nation, One Election : लोकसभा चुनाव के चौथे चरण के तहत सोमवार को मतदान पूरा हो गया है। संविधान का अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू-कश्मीर में पहली बार लोकसभा चुनाव के लिए मतदान हुआ। इस दौरान श्रीनगर निर्वाचन क्षेत्र में 37.98 प्रतिशत मतदान हुआ और निर्वाचन आयोग ने कहा कि यह दशकों में सबसे अधिक मतदान है।

लोकसभा का चुनाव होते ही जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव और एक देश-एक चुनाव की बात भी उठने लगी है। मंगलवार को कुपवाड़ा में जम्मू कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला ने कहा, 'हम लोग हर वक्त तैयार थे। ये एक देश-एक चुनाव की बात कर रहे हैं। हमने गुजारिश की थी कि शुरूआत जम्मू-कश्मीर से कीजिए। इन्होंने नहीं किया। हम आज भी तैयार हैं, कल भी तैयार हैं, हर वक्त तैयार हैं।'

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क्या है एक देश-एक चुनाव?

मोदी सरकार काफी लंबे समय से एक देश-एक चुनाव का समर्थन करती आई है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द के नेतृत्व में एक उच्च-स्तरीय समिति ने 'एक राष्ट्र, एक चुनाव' पर काम किया है। समिति ने 18,000 पन्नों की अपनी रिपोर्ट तैयार कर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भी सौंप दी है। इस रिपोर्ट में लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का प्रस्ताव है। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द के नेतृत्व में पिछले साल सितंबर में बनी समिति ने अन्य देशों में होने वाली चुनावी प्रक्रियाओं का अध्ययन किया है। इसके अलावा 39 राजनीतिक दलों, भारत के चुनाव आयोग और अर्थशास्त्रियों से भी सुझाव लिए गए हैं।

सीधे शब्दों में कहें तो एक देश-एक चुनाव के पीछे सरकार का मकसद लोकसभा और विधानसभा चुनावों को एक साथ कराना है। आंध्र प्रदेश, सिक्किम और ओडिशा में लोकसभा चुनाव के साथ मतदान है। महाराष्ट्र, झारखंड और हरियाणा में इस साल के अंत में चुनाव होना है। देश में एक साथ चुनाव होने से पैसे और संसाधन दोनों की बचत होगी। साल में कई बार चुनाव अधिकारियों और सुरक्षा बलों की तैनाती में भी कटौती होगी। जिससे सरकारी खजाने पर बोझ कम होगा।

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1967 तक हुआ 'एक देश, एक चुनाव'

भारत में एक देश-एक चुनाव कोई नई बात नहीं है। इससे पहले भी इस तरह से चुनाव कराए जा चुके हैं। साल 1952, 1957, 1962, 1967 में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ हुए थे। इसके बाद दोनों चुनाव एक साथ नहीं हो सके। इसका कारण लोकसभा और विधानसभा का समय से पहले भंग होना है। 1968 और 1969 में कई विधानसभा को समय से पहले भंग करना पड़ा है और 1970 में लोकसभा को समय से पहले भंग किया था। इसी तरह 1970 के बाद से 'एक देश, एक चुनाव' की परंपरा खत्म हो गई।

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Published May 14th, 2024 at 18:57 IST

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