आजाद भारत में कभी जनगणना में जातियों की गिनती नहीं, 2010 में मनमोहन का आश्वासन, मगर...; अब कांग्रेस को BJP ने आईना दिखाया

जातीय जनगणना पर बीजेपी के नेता कांग्रेस को आईना दिखा रहे हैं, जो केंद्र सरकार के हालिया ऐलान के बाद से इसका पूरा क्रेडिट लेने के लिए चिल्लाए जा रही है।

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Bharatiya Janata Party leader Amit Malviya or Congress leader Rahul Gandhi
Bharatiya Janata Party leader Amit Malviya or Congress leader Rahul Gandhi | Image: X

Caste Census: जातीय जनगणना के विषय पर राजनीति अपने-अपने फायदे की है, लेकिन दरकिनार नहीं किया जा सकता है कि भारत की आजादी के बाद से अब तक हिंदुस्तान के भीतर जनगणना तो हुईं, लेकिन जातियों को गिनती नहीं की गई। ये खुद मौजूदा सरकार कह रही है और बीजेपी के नेता कांग्रेस को आईना दिखा रहे हैं, जो केंद्र सरकार के हालिया ऐलान के बाद से इसका पूरा क्रेडिट लेने के लिए चिल्लाए जा रही है।

केंद्र में बीजेपी की सरकार है और विपक्ष का दबाव लंबे समय से जातीय जनगणना को लेकर रहा है। कांग्रेस तेलंगाना जैसे राज्य में इस दिशा में कदम उठा चुकी थी। वैसे ये जातीय जनगणना नहीं, बल्कि जातीय सर्वेक्षण था। ऐसा इसलिए कि संविधान के अनुच्छेद 246 की केंद्रीय सूची की क्रम संख्या 69 के अनुसार जनगणना केंद्र सरकार का विषय है। बावजूद इसके कांग्रेस ने राज्य में जातीय सर्वेक्षण के कराया, जो ठीक वैसे ही था, जैसे पिछली बार केंद्र में रहते हुए कांग्रेस ने जाति जनगणना की जगह सर्वेक्षण (SECC) कराया। बीजेपी कांग्रेस को ये बात याद दिला रही है।

2010 में मनमोहन सिंह ने क्या कदम उठाए?

जातिवार गणना पर केंद्र की बीजेपी सरकार के प्रेस नोट के मुताबिक, 2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लोकसभा में आश्वासन दिया था कि जाति जनगणना पर कैबिनेट में विचार किया जाएगा। इसके बाद एक मंत्रिमंडल समूह का गठन हुआ। इसमें अधिकतर राजनीतिक दलों ने जाति आधारित जनगणना की सिफारिश की थी। बावजूद इसके मनमोहन सरकार ने जाति जनगणना की जगह एक सर्वेक्षण (SECC) कराया।

बीजेपी नेता अमित मालवीय कहते हैं- 'कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने जाति जनगणना के विषय को सिर्फ अपने राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल किया।'

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भारत में 1931 में जाति जनगणना हुई

जब देश में अंग्रेजों की हुकूमत थी, उस समय 1931 में जाति जनगणना देश के भीतर हुई। मौजूदा सरकार दावा कहती है कि उसके बाद देश में होने वाली जनगणनाओं में जातियों की गिनती नहीं की गई। बताया जाता है कि अब तक की जनगणना में दलित और आदिवासियों की संख्या को जरूर गिना गया और उनको आरक्षण भी मिला, लेकिन ओबीसी वर्ग इसका हिस्सा नहीं रहा। अब बीजेपी सरकार अगर जनगणना के साथ जातीय गणना करा पाती है तो इससे ओबीसी वर्ग की देश में स्थिति स्पष्ट हो जाएगी कि पिछड़ी और अति पिछड़ी (ओबीसी और ईबीसी) जातियों के कितने लोग देश में हैं।

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Published By :
Dalchand Kumar
पब्लिश्ड