स्वाति मालिवाल को बड़ा झटका, रेप पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामले में कोर्ट ने FIR रद्द करने से किया इनकार
BREAKING: स्वाति मालिवाल को रेप पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामले में बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने FIR रद्द करने से इनकार कर दिया।
- भारत
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Swati Maliwal: स्वाति मालिवाल को रेप पीड़िता की पहचान उजागर करने के मामले में बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने FIR रद्द करने से इनकार कर दिया। बता दें, ये मामला साल 2016 में एक 14 साल की दलित रेप पीड़िता की पहचान उजागर करने का है। रेप पीड़िता की पहचान उजागर करने के चलते आप पार्टी की राज्य सभा सांसद और दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष स्वाति मालिवाल के खिलाफ दर्ज FIR को रद्द करने की मांग की गई।
दरअसल, स्वाति मालिवाल पर नाबालिग रेप पीड़िता का नाम उजागर करने के आरोप में दिल्ली पुलिस ने उनके खिलाफ जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के अलग-अलग प्रावधानों के तहत FIR दर्ज की थी। इसी FIR को रद्द करवाने की मांग को लेकर स्वाति मालिवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने भारतीय दंड संहिता, 1860 की धारा 228a के तहत दर्ज FIR को रद्द करने से इनकार किया है।
भर्ती में गड़बड़ी मामले में खुद फंसी मालीवाल
इससे पहले एक अन्य मामले में आम आदमी पार्टी की राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल को दिल्ली महिला आयोग में नियुक्ति में गड़बड़ी मामले में दिल्ली हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। दिल्ली हाई कोर्ट ने DCW की नियुक्ति मामले में स्वाति मालीवाल पर भ्रष्टाचार के आरोप तय करने के खिलाफ याचिका खारिज कर दी।
स्वाति मालीवाल पर आरोप है कि उन्होंने महिला आयोग के अध्यक्ष पद पर रहते हुए अगस्त 2015-16 के बीच गैरकानूनी तरीके से अपने पहचान और आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं को नियुक्ति की। इस मामले में निचली अदालत से आरोप तय होने के आदेश को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
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इससे पहले ट्रायल कोर्ट ने 8 दिसंबर 2022 को स्वाति मालीवाल और तीन अन्य के खिलाफ भारतीय दंड संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1)(डी) (लोक सेवक द्वारा आपराधिक कदाचार) सहित अन्य प्रावधानों के तहत आरोप तय करने का आदेश दिया था।
BJP विधायक की शिकायत पर FIR दर्ज
बता दें, डीसीडब्ल्यू की पूर्व अध्यक्ष और भारतीय जनता पार्टी की विधायक बरखा शुक्ला सिंह की शिकायत इस मामले में FIR दर्ज की गई। शिकायतकर्ता का आरोप है कि ये नियुक्तियां प्रक्रियाओं, नियमों, विनियमों का उल्लंघन करते हुए की गईं, यहां तक कि सामान्य वित्त नियमों (GFR) और अन्य दिशानिर्देशों का उल्लंघन करते हुए पदों के लिए विज्ञापन भी जारी नहीं किया और ऐसे व्यक्तियों को पारिश्रमिक/वेतन/मानदेय के रूप में धनराशि दी गयी।