अपडेटेड 6 January 2025 at 17:38 IST
BIG BREAKING: प्रशांत किशोर को 14 दिनों तक खानी होगी जेल की हवा, पहले मिली जमानत फिर कहां फंसा पेच?
BPSC के छात्रों के साथ आमरन अनशन कर रहे जनसुराज के प्रमुख प्रशांत किशोर को कोर्ट ने जमानत दे दी, लेकिन इसके बाद भी वो 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में रहेंगे।
- भारत
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बिहार की राजधानी पटना में BPSC छात्रों के साथ परीक्षा रद्द करवाने की मांग को लेकर आमरन अनशन पर बैठे जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर को कोर्ट ने सशर्त जमानत दे दी। कोर्ट ने उन्हें जिन शर्तों पर जमानत दी है, पीके ने उन शर्तों पर जमानत लेने से इनकार कर दिया। ऐसे में उन्हें कोर्ट ने 14 दिनों के न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।
कोर्ट में पेशी के दौरान जन सुराज पार्टी के प्रमुख पीके ने कहा, "रुकना नहीं है। रुक जाएंगे तो सरकार और प्रशासन का मन बढ़ जाएगा।" बता दें, पटना पुलिस जब पीके को गिरफ्तार करने के लिए पहुंची, तो हलचल तेज हो गई। इस बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुई, जिसमें ये दावा किया जा रहा था कि पुलिस ने पीके को थप्पड़ मारा। वहीं कोर्ट की जमानत अस्वीकार करने के बाद पीके ने इन दावों का खंडन कते हुए कहा कि मुझे किसी ने थप्पड़ नहीं मारा।
मैंने जेल जाना स्वीकार किया: प्रशांत किशोर
जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने कहा, "...पुलिस मुझे गांधी मैदान से AIIMS लेकर गई। वहां तक पुलिस का व्यवहार मेरे साथ एकदम ठीक था। सुबह 5 बजे से 11 बजे तक पुलिस मुझे एंबुलेंस में बिठाकर अलग-अलग जगहों पर घुमाती रही और किसी ने नहीं बताया कि मुझे कहां लेकर जा रहे हैं। 5 घंटे के बाद मुझे पुलिस फतुहा के समुदायिक केंद्र में लेकर गई। वहां पर डॉक्टरों से वे मेरा परीक्षण कराकर सर्टिफिकेट लेना चाहते थे। मैंने डॉक्टरों को बताया कि मैं इसके लिए इजाजत नहीं दे रहा हूं। मैं कोई गैरकानूनी काम नहीं कर रहा था...पुलिस ने कोशिश की वहां के डॉक्टर इनको सर्टिफिकेट दे दें लेकिन वहां के डॉक्टरों का मैं धन्यवाद देता हूं कि उन्होंने गैरकानूनी सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया... उसके बाद मुझे कोर्ट में लाया गया, कोर्ट से मुझे बेल मिली है लेकिन उस बेल में लिखा है कि मैं फिर से ऐसा नहीं करूंगा... मैंने बेल को अस्वीकार कर दिया है मैंने जेल जाना स्वीकार किया है।"
लाठी चलाना जायज और आवाज उठाना क्राइम है तो…: प्रशांत किशोर
पीके ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्होंने इसलिए कोर्ट की जमानत स्वीकार नहीं की क्योंकि उस बेल में बात लिखी है कि आप फिर से ऐसा कोई गलत काम नहीं करेंगे। इसलिए मैंने इस बेल को रिजेक्ट किया और जेल जाना स्वीकार किया। इसलिए स्वीकार किया क्योंकि मूल अधिकार की लड़ाई है, अगर बिहार में युवाओं और महिलाओं पर लाठी चलाना जायज है, और उसके खिलाफ आवाज उठाना क्राइम है, तो हम उस जुर्म को स्वीकार करते हैं और जेल जाना स्वीकार करते हैं।
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प्रशांत किशोर का ये सवाल ना केवल सरकार बल्कि न्यातंत्र के लिए भी है, ये जरूर पूछा जाना चाहिए कि क्या हाथ जोड़कर अपने हक की मांग करने वाले बेरोजगार युवा पर हाड़ कंपाने वाली ठंड में लाठी चलाना, उनके ऊपर पानी की बौछार करना कौन से संविधान के तहत जायज है? बिहार के युवा को कोर्ट, सरकार और पुलिस से ये सवाल भी पूछना चाहिए कि अगर पुलिस का निहत्थे युवाओं पर लाठीचार्ज करना, वाटर कैनन इस्तेमाल करना जायज है तो शांति रुप से प्रदर्शन करना कहां से क्राइम है?
सरकार की विफलता के खिलाफ आवाज उठाना अपराध कैसे है?
जनता का ये सवाल सत्ताधीशों से होना चाहिए कि सरकार की विफलता का बोझ जनता क्यों ढोती रहे? ये सरकार की विफलता है कि एक परीक्षा सही तरीके से आयोजित नहीं करा सकती, ये सरकार की विफलता है कि आज अच्छी पढ़ाई, अच्छी कमाई, शांतिपूर्ण और अच्छे लाइफस्टाइल के लिए बिहार की जनता को दूसरे राज्यों में पलायन करना पड़ रहा है। ऐसे में जो अपनी मातृभूमि को छोड़कर नहीं जाना चाहते हैं, वो हक की आवाज उठा रहे हैं, तो उन्हें चुप कराने के लिए इस तरह के हत्थकंडे अपनाए जा रहे हैं। बिहार में पुलिस प्रशासन ने स्टूडेंट्स पर लाठीचार्ज की एक परंपरा बना दी है। जैसे ही सरकार के विरोध में आवाज उठती है, जनता को चुप कराने के लिए उनके ऊपर लाठी बरसाने को तैयार हो जाती है। छात्रों पर लाठी बरसाए जाते हैं और सरकार गूंगी बनी नजारे का आनंद उठाती है। वहीं चुनाव आने पर बड़े वादों के साथ जनता के बीच पहुंच जाती है।
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Published By : Kanak Kumari Jha
पब्लिश्ड 6 January 2025 at 17:03 IST