बांसुरी स्वराज ने 'पितृसत्ता' के मुद्दे पर राहुल गांधी पर किया पलटवार, कहा- तब कहां थे जब केआर रमेश ने 'रेप के मजे लो' वाला बयान दिया
बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने 'पितृसत्ता को खत्म करो' के मुद्दे पर राहुल गांधी को घेरा है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं के पुराने बयान का जिक्र करते हुए पूछा कि तब राहुल गांधी चुप्पी क्यों साधे हुए थे, क्या तब उन्हें उपदेश देना मुनासिब नहीं लगा?
- भारत
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Bansuri Swaraj Attacked on Rahul Gandhi: बीजेपी सांसद बांसुरी स्वराज ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘पितृसत्ता को खत्म करो’ वाले बयान पर पलटवार किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने देश में एक झूठा नैरेटिव बनाने की कोशिश की।
बांसुरी स्वराज ने राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कहा, 'वह 'पितृसत्ता को खत्म करने' (Smashing the Patriarchy) की बात करते हैं, एक ऐसी सोच जिसका मैं पूरी तरह समर्थन करती हूं। लेकिन, मैं राहुल गांधी से पूछना चाहती हूं कि क्या आप 'पितृसत्ता को खत्म करने' का नारा सिर्फ पुणे के मंच तक ही सीमित रखते हैं? और क्या आप अपनी कांग्रेस पार्टी के अंदर राजनीतिक पितृसत्ता को बढ़ावा देते रहते हैं? राहुल गांधी के पास न तो कोई विजन है और न ही कोई सकारात्मक एजेंडा। नतीजतन, वह अपनी रिसर्च टीम द्वारा दिए गए नोट्स का इस्तेमाल करके देश के युवाओं और सम्मानित मतदाताओं को गुमराह करने की कोशिश करते हैं।'
'पितृसत्ता खत्म की शुरुआत कांग्रेस से करनी चाहिए'
उन्होंने आगे कहा, 'आइए कांग्रेस पार्टी के रिपोर्ट कार्ड पर नजर डालते हैं। आखिरकार, अगर कोई सच में पितृसत्ता को खत्म करना चाहता है, तो राहुल गांधी को इसकी शुरुआत कांग्रेस पार्टी से ही करनी चाहिए। उन्होंने 22 अगस्त को पुणे के मंच पर यह बयान दिया, फिर भी ठीक दस दिन पहले उन्होंने एक महिला प्रधानमंत्री, खास तौर पर हमारे मित्र देश इटली की मौजूदा प्रधानमंत्री जियोर्जिया मेलोनी पर किए गए एक भद्दे मजाक में हिस्सा लिया था। यह लॉकर रूम में लड़कों की बातचीत सुनने जैसा था। उन्होंने सोशल मीडिया पर चर्चा बटोरने के लिए सस्ते इशारों और सनसनीखेज बातों का सहारा लिया। 'देश के नेता प्रतिपक्ष को यह शोभा नहीं देता। ऐसा लगता है कि अब नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी केवल मीम्स और रील के लिए ही बयान देते हैं।'
जब रेट पूछे गए थे, तब कहां थे राहुल गांधी?- बांसुरी
बांसुरी कहती हैं, 'मैं राहुल गांधी और उनकी कांग्रेस पार्टी के दोहरेपन को उजागर करना चाहती हूं। कुछ चंद उदाहरण आपके सामने रखना चाहूंगी, क्योंकि लिस्ट बहुत लंबी है। सबसे पहले मंडी की सांसद कंगना रनौत से जुड़े मुद्दे पर बात करते हैं। जब कंगना रनौत को टिकट मिला था, तब कांग्रेस पार्टी की ही एक महिला नेता सुप्रिया श्रीनेत के सोशल मीडिया अकाउंट से उन पर इतनी अभद्र टिप्पणी की गई थी। आप सभी को याद होगा, रेट पूछा गया था। लेकिन उस वक्त राहुल गांधी चुप्पी साधे हुए थे। यहां तक की मैंने व्यक्तिगत तौर पर जाकर इस अभद्र टिप्पणी के खिलाफ शिकायत की थी।'
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इन मुद्दों पर भी राहुल गांधी को घेरा
उन्होंने आगे अप्रैल 2024 का जिक्र करते हुए कहा, 'कांग्रेस पार्टी के कद्दावर नेता रणदीप सुरजेवाला ने कैथल की एक रैली में बीजेपी की तत्कालीन उपाध्यक्ष और मथुरा की सांसद हेमा मालिनी के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी की थी। लेकिन राहुल गांधी की ओर से इस मुद्दे पर भी कोई बयान नहीं आया। वे दोबारा चुप्पी साधे रहे।'
बांसुरी स्वराज ने भड़कते हुए कहा, 'अधीरंजन चौधरी ने भारत की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति को राष्ट्र पत्नी कहकर संबोधित किया। लेकिन कांग्रेस नेता ने मौन साध लिया। मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 2020 में बीजेपी की महिला कैंडिडेट को आइटम कहकर संबोधित किया था। राहुल गांधी जी तब आप कहां थे? तब आपने पितृसत्ता को खत्म क्यों नहीं किया? तब आप उपदेश क्यों नहीं दे रहे थे? '
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केआर रमेश के बयान का भी किया जिक्र
वे यहीं नहीं रुकीं, उन्होंने आगे कहा कि सबसे ज्यादा कचोटने वाला बयान केआर रमेश का है, जिन्होंने कर्नाटक की विधानसभा में यह कह दिया था कि जब रेप को रोका नहीं जा सकता, तो लेटिये और मजे लीजिए।