'जिनमें राम मंदिर जाने की हिम्मत नहीं है, मथुरा-काशी को नहीं मानते, वे शिव तांडव की बात कर रहे हैं...', CM हिमंता ने राहुल गांधी पर बोला हमला
राहुल गांधी के शिव बारात वाले बयान पर असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सोमवार को तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने LoP पर निशाना साधते हुए कहा कि राम मंदिर जाने की हिम्मत नहीं है और शिव तांडव की बात कर रहे हैं।
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सोमवार, 12 अक्टूबर को असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने लोकसभा नेता प्रतिपक्ष (LoP) के शिव तांडव बयान पर तीखा पलटवार किया है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नेता प्रतिपक्ष पर जोरदार हमला करते हुए कहा कि जिनमें राम मंदिर जाने की हिम्मत नहीं है और शिव तांडव की बात कर रहे हैं। हिप्पोक्रेसी की भी एक सीमा होती है।
सीएम हिमंता ने विपक्ष और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि "यह बिना जनसमर्थन के भारत में सत्ता बदलने की कोशिश है। इस पूरे आंदोलन को विदेशी ताकतों का समर्थन प्राप्त है जो नहीं चाहतीं कि भारत तरक्की करे। इसलिए यह आंदोलन निराश लोगों, 'दिमागी नक्सलियों' और उन लोगों का नतीजा है जो नहीं चाहते कि भारत तरक्की करें।"
राम मंदिर जाने की हिम्मत नहीं और शिव तांडव.., CM हिमंता
सीएम हिमंता ने एक्स पर वीडियो जारी करते हुए कहा कि आज जो दिनभर भगवान राम का विरोध करते हैं, जो पूरे दिन सनातन को कोसते हैं आज उन्होंने शिव याद आ गए। कहते हैं मैं तांडव करूंगा। तांडव करने के पहले सनातन को, सम्मान करने का सीखो।
आगे उन्होंने कहा 'अगर आपको सचमुच सनातन के लिए आपका सम्मान हैं, तो क्या आप अभी भी राम मंदिर जा सकते हैं? जो व्यक्ति राम मंदिर को स्वीकार नहीं करते हैं, मथुरा काशी को नहीं मानते हैं, वो व्यक्ति आज शिवजी का नाम लेगा। तांडव करेगा?'
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मार्च को राहुल ने बताया था शिव बारात
दरअसल, सोमवार को सुप्रीम कोर्ट तक इंडी ब्लॉक के मार्च निकालने को लेकर राहुल गांधी ने इसे शिव की बारात और शिव का तांडव बताया है। मार्च से पहले बोला था कि इस राजनीतिक आंदोलन के लिए किसी तय स्क्रिप्ट या प्लानिंग की जरूरत नहीं। यह पूरी तरह स्वाभाविक है। इसमें कोई भी शामिल हो सकता है। राहुल के इसी बयान के बाद सीएम हिमंता की प्रतिक्रिया आई है।
आंदोलन को विदेशी ताकतों का समर्थन प्राप्त-CM हिमंता
वहीं, विपक्ष के विरोध प्रदर्शनों पर मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा कहते हैं, "यह बिना जनसमर्थन के भारत में सत्ता बदलने की कोशिश है। इस पूरे आंदोलन को विदेशी ताकतों का समर्थन प्राप्त है जो नहीं चाहतीं कि भारत तरक्की करे। इसलिए यह आंदोलन निराश लोगों, 'दिमागी नक्सलियों' और उन लोगों का नतीजा है जो नहीं चाहते कि भारत तरक्की करें।"